बिजनौर। सदर विधायक रुचिवीरा का मंत्रिमंडल के विस्तार में मंत्री बनाना तय माना जा रहा था पर ऐन वक्त पर उन्हें मंत्री बनाने की सूची से हाईकमान ने बाहर कर दिया।
रुचिवीरा कबीना मंत्री आजम खां की बेहद नजदीकी है। आजम खां के करीबी को मंत्रिमंडल में शामिल न करने पर आजम खां मंत्रिमंडल समारोह में शामिल नहीं हुए और रुचिवीरा समेत अन्य समर्थकों को साथ लेकर लखनऊ से लौट आए।
सपा सरकार बनने के बाद बिजनौर जिले से धामपुर के विधायक मूलचंद चौहान और नगीना के विधायक मनोज पारस को राज्य मंत्री बनाया गया था।
लोकसभा चुनाव के दौरान मनोज पारस को एक दुष्कर्म के मामले में फंसने व लोकसभा चुनाव में पूर्व सांसद यशवीर सिंह का विरोध करने पर मंत्री पद से हटा दिया गया था। उपचुनाव में बिजनौर विधानसभा सीट से रुचि वीरा सपा की विधायक बनीं।
विधायक बनने के बाद उसने अपनी ताकत का अहसास कराया तथा पार्टी में अपने विरोधियों को सिर नहीं उठाने दिया। दो दिन से रुचिवीरा लखनऊ में डेरा डाले थीं।
भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने रुचिवीरा को अलग बुलाकर काफी देर तक लंबी बात की थी।
राजनैतिक गलियारों में रुचिवीरा के मंत्री बनने की चर्चा थी। आजम खां भी रुचिवीरा के मंत्री बनाने के पक्ष में थे। रुचिवीरा या सरोजनी अग्रवाल में से एक महिला को मंत्री बनना तय माना जा रहा था।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक उड़ीसा से लौटे मुख्यमंत्री आजम खां से नहीं मिले तो नाराज आजम खां रुचिवीरा अन्य समर्थकों को साथ लखनऊ से लौट आए। सूत्रों की माने तो रुचि वीरा का नाम मंत्री की सूची से था ऐन वक्त पर उसे काट दिया गया।
अभी एक छोटे मंत्रिमंडल के विस्तार होने की और चर्चा है उसमें आजम खां के कोटे के मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है।
पहली बार बने स्वतंत्र प्रभार के मंत्री मूलचंद
धामपुर के विधायक मूलचंद चौहान को राज्य मंत्री से स्वतंत्र प्रभार का मंत्री बनाने से उनके समर्थक गदगद है। 2003 में लोकदल के साथ मिलकर बनी सरकार में मूलचंद चौहान को पंचायती राज मंत्री बनाया गया था।
मौजूदा सरकार में वे पर्यटन राज्य मंत्री थी। स्वतंत्र प्रभार के मंत्री मूलचंद चौहान पहली बार बने हैं।
मनोज पारस को नहीं मिली लालबत्ती
नगीना के विधायक मनोज पारस को फिर से लालबत्ती मिलने का पूरा भरोसा था। पर उन्हें लाल बत्ती नहीं मिली। सूत्रों की माने तो मनोज पारस के समर्थकों ने स्वागत के लिए मालाएं भी तैयार करा ली थी लेकिन उम्मीद धरी ही रह गई।
सपा से खुशनूद खां का निष्कासन समाप्त
बिजनौर। सदर विधायक रुचिवीरा के करीबी और सपा के पूर्व राज्य कार्यकारिणी सदस्य खुशनूद खां का पार्टी हाईकमान ने निष्कासन खत्म कर दिया है।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के बारे में अशोभनीय टिप्पणी करने पर खुशनूद खां को पिछले दिनों पार्टी से निष्कासित किया था।
जिला पंचायत चुनाव के दौरान खुशनूद खां अपने विरोधियों की चाल में फंस गए थे। मोबाइल पर बात करने के दौरान खुशनूद खां ने मुलायम सिंह के बारे में अशोभनीय टिप्पणी कर दी थी। विरोधियों ने यह आडियो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत पार्टी के अन्य नेताओं को सुनाई।
हाईकमान ने खुशनूद खां का पार्टी से निष्कासित करके जिलाध्यक्ष को निर्देश दिए थे कि जिला पंचायत चुनाव का परिणाम घोषित न होने तक खुशनुद खां के निष्कासन के पत्र को सार्वजनिक नहीं किया जाए।
चार दिन पहले यह पत्र सार्वजनिक कर दिया। विरोधियों ने माना विधायक रुचिवीरा कमजोर हो गई है, तभी तो खुशनूद खां का निष्कासन हुआ। रुचिवीरा पिछले दो दिन से लखनऊ में डेरा डाले थी। वे पार्टी हाईकमान से खुशनूद खां का निष्कासन खत्म कराने में कामयाब रही।
पार्टी के प्रदेश महासचिव अरविंद कुमार सिंह गोप की ओर से जारी पत्र में कहा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुशनूद खां के निष्कासन संबंधी प्रत्यावेदन पर विचार करने के बाद उनका पार्टी से निष्कासन खत्म किया। खुशनूद खां का निष्कासन खत्म होने से उनके समर्थक गदगद है।