भाइयों की कलाई पर सूती कलावा बांधें बहनें
हल्दौर। कोरोना काल में बहनों को संक्रमण से बचाव के लिए राखियों की खरीदारी करने में बेहद सावधानी बरतनी पड़ेगी। पंडितों के अनुसार भाइयों की कलाई पर कलावा बांधना उचित है, तो चिकित्सकों ने महिलाओं को इस वायरस के फैलने से रोकने के लिए प्लास्टिक व धातु से निर्मित राखियों की अपेक्षा सूती धागे, कलावा और कपड़े से बनी राखियों को अपने भाइयों की कलाई पर बांधने की सलाह दी है।
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक त्योहार रक्षाबंधन तीन अगस्त सोमवार को मनाया जाएगा। हर साल बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने का बेसब्री से इंतजार करती हैं। बहनें बाजारों से अपने भाइयों की कलाई पर बांधने के लिए तांबा, पीतल, सोने, चांदी, स्टील, लोहा, लकड़ी, मोती, नग आदि चीजों से निर्मित राखियां खरीदती हैं। इन दिनों स्थानीय दुकानों एवं ठेलियों पर विभिन्न प्रकार की राखियां बिक्री के लिए सजाई गई हैं। कपड़े और सूती धागे से निर्मित स्वदेशी राखियां इस बार रक्षाबंधन के त्योहार पर नजर आ रही हैं। महिलाओं को वायरस से बचाव के लिए बाजार से उपयुक्त राखी का चुनाव कर खरीदारी करनी होगी। पंडित विपिन शर्मा का कहना है कि शास्त्रों में कलावा असली रक्षा कवच माना जाता है। यह धागा पूजा का अभिन्न अंग है, जो अभिमंत्रित होकर मनुष्य की शक्ति को बढ़ाता है। बहनें जो कलावा बांधें उसे भाइयों को एक साल तक अपनी कलाई पर बांधे रखना चाहिए। अगले साल रक्षाबंधन पर बहनों से पुन: दूसरा रक्षा सूत्र बंधवा कर पहले कलावे को नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। इससे भाई-बहन के बीच अटूट स्नेह पैदा होते हैं। पंडित प्रभुदत्त डबराल बताते हैं कि धातु व अन्य चीजों से निर्मित राखियों के स्थान पर भाइयों की कलाई पर सूती कलावा बांधना अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्तमान में चल रहे संक्रमण से सुरक्षित रखने में भी यह काफी अच्छा है।
सूती धागे पर अधिक समय नहीं टिकता वायरस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद के अनुसार कोरोना का वायरस किसी भी वस्तु पर पनप सकता है। अब तक की स्टडी में जो सामने आया है कि वह अलग-अलग वस्तुओं पर एक समय तक जीवित रह सकता है। इसलिए इससे सभी को सावधान रहने की आवश्यकता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी मदन पाल सिंह बताते हैं कि कोरोना वायरस तांबा, पीतल, लोहा, स्टील आदि धातुओं पर करीब तीन दिनों तक जीवित रहता है। इससे संक्रमण कई दिनों तक फैलने का खतरा बना रहता है, जबकि सूती धागे व कपड़े पर वायरस धातुओं के मुकाबले बहुत कम समय तक टिकता है। ऐसे में उन्होंने वायरस संक्रमण से बचाव के लिए महिलाओं को रक्षाबंधन के पर्व पर अपने भाइयों की कलाई पर सूती धागा व कपड़े से निर्मित राखियों के बांधने की सलाह दी है। साथ ही उन्होंने वायरस से बचाव के लिए लोगों को अपने मुंह को मास्क से अच्छी ढकने को कहा है।