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नए साल में भी कैश की किल्लत बरकरार

Tue, 10 Jan 2017 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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धामपुर में एचडीएफसी बैंक के बाहर लगी खाताधारकों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बिजनौर के धामपुर में नए साल का पहला महीना भी लगभग आधा बीतने जा रहा है। इसके बावजूद बैंकों में कैश की किल्लत से लोग परेशान हैं। बैंकों में सोमवार को भी दिनभर लोगों की भारी भीड़ रही। 
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अधिकांश बैंकों ने  दो-दो हजार रुपये का नोट ग्राहकों को दिया। अधिकांश एटीएम बंद होने के कारण ग्राहकों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। अधिकतर ग्राहकों ने कहा कि अक्सर ऐसा होता है कि बारी आने पर बैंक हो या एटीएम कैश खत्म हो जाता है।
रविवार को नगर के किसी भी एटीएम ने नोट नहीं उगले। बैंक अधिकारी तो कैश नहीं होने की बात बताकर पीछा छुड़ा लेते हैं। ग्राहक कैश की आस में दिनभर भूखा प्यासे लाइन में लगकर शाम को लौट जाते हैं। एचडीएफसी बैँक के एटीएम के बाहर लगी लगी लाइन में कैश के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे 
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इंतजार सिंह ने बताया कि जब से नोटबंदी हुई है, तब से विकास पिछड़ गया है। लोगों के निर्माणाधीन कार्य रुक गए हैं। अभी भी उम्मीद नहीं है कि वह रुके काम कब से शुरू होंगे। शुरू होंगे भी या नहीं। मलखान सिंह ने कहा कि वह अपनी जमीन को बेचकर शहर में रोजगार करने की फिराक में था। जो जमीन नोटबंदी से पहले पांच लाख प्रति बीघा की बिक रही थी। उसकी कीमत गिर गई। 
गांव सरकड़ा के कैलाश सिंह ने कहा कि नोटबंदी से लोगों को लाभ कम और परेशानी ज्यादा बढ़ी है। आम जनता ही लाइन में लगी है। कोई अधिकारी, नेता या उद्योगपति अभी तक लाइन में लगा नजर नहीं आया है। भागूवाला में पंजाब नेशनल बैंक भागूवाला में कैश न मिलने से ग्राहकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कैश मिलने की उम्मीद के साथ ग्राहक बैंक गेट पर शाम चार बजे तक डटे रहे। कैश न आने पर ग्राहकों को खाली हाथ मायूस लौटना पड़ा। सोमवार सुबह से ही पीएनबी भागूवाला शाखा पर ग्राहकों की खासी भीड़ जुटी रही। मगर बैंक पर कैश की व्यवस्था नहीं थी। बैंक अधिकारी कैश के लिए नजीबाबाद स्थित बैंकों से संपर्क बनाए रहे, लेकिन उन्हें कैश नहीं मिल सका।  बैंक के भीतर और बाहर दर्जनों ग्राहक जमे थे। शाम चार बजे तक भी जब बैंक में कैश नहीं पहुंच सका, तो बैंक प्रबंधक एवं अन्य कर्मचारियों ने ग्राहकों से खेद व्यक्त उनसे मंगलवार काे बैंक से संपर्क करने की सलाह दी। उधर, एसबीआई भागूवाला शाखा में अधिकतम चार हजार रुपये मिले। अफजलगढ़ में ग्राहक सुरेंद्र सिंह, राजपाल सिंह, रामपाल, दर्शन बलवंत,  हरदयाल सिंह आदि ने कहा कि नोटबंदी के बाद ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों में कोई सुधार नहीं हुआ। इन ग्राहकों ने कहा कि वित्तमंत्री अरुण जेटली के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। अभी तक बैंकों में कैश नहीं आने के कारण मुसीबतें रोज झेलनी पड़ रही है। सोमवार को अफजलगढ़ के पीएनबी, एसबीआई आदि बैंकों में पहले जैसी भीड़ की हालात रही।  रविवार को बैंकों की छुट्टी होने से खातेधारक हलकान रहे। स्थिति सामान्य हो भी जाती तो बैंक अधिकारियों ने एटीएम में कैश नहीं डाला। दिनभर ग्राहक एटीएम के चक्कर काटते रहे।  सोमवार को भी  कोई एटीएम नहीं चल सका। आधे एक घंटा एटीएम चलने के बाद बंद हो गए। सर्वयूपी  ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक कादराबाद, सिंडिकेट बैंकों की हालत में अब तक कोई सुधार नहीं हो पाया है।
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