गजरौला शिव। शब-ए-बरात 13 (आज) फरवरी को मनाई जाएगी। 14 फरवरी शुक्रवार का रोजा रखा जाएगा। 13 और 14 फरवरी के बीच वाली रात इबादत की रात है। इस दिन मुसलमान आतिशबाजी से परहेज़ करें, कोई हुड़दंग बाजी न करें। शब-ए-बराअत के दिन मस्जिदों में खास इबादत करें । इस मस्जिदों में नमाजियों की संख्या बढ़ जाती है, मस्जिदें नमाजियों से पुर रौनक रहती हैं।
नमाजी ईशा की नमाज के बाद कब्रिस्तानों में पहुंचकर अपने अजीज मरहूमों को खिराजे अकीदत पेश कर उनकी मगफिरत के लिए अल्लाह से दुआएं मांगते हैं। अगले दिन नफली रोजे भी रखे जाते हैं।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद शहर बिजनौर के सचिव कारी शमीम कहते हैं शब-ए-बरात शाबान माह की 14 तारीख को मनाई जाती है। इस दिन अगर इंसान चाहे तो अल्लाह के सामने तौबा कर अपने गुनाहों को माफ कर आ सकते है । इस रात में अधिकतर मुसलमान पूरी रात जागकर इबादत करें, अगले दिन नफली रोजे रखे।
कहा जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों के बहुत नजदीक होता है। इंसान रो-रोकर दुआएं मांगते हैं, अल्लाह सुनता है। यही वजह है कि लोग इस रात अपने जरिए जाने-अनजाने में किए गए गलत कार्यों से तौबा करते हैं, और अपने बुरे कामों से बचने के लिए दुआएं मांगते हैं।
ईशा नमाज पढ़कर कब्रिस्तान यह सोचकर जाना चाहिए कि एक दिन हमें भी जाना है, वह जिंदगी का आखरी दिन होगा। चाहशीरी जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना वरीस अहमद ने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि शब-ए-बरात पर अगर आप कब्रिस्तान जा रहे हैं तो शोर-शराबा करते हुए न जाएं, मेले-ठेले न लगाये, दूसरों को परेशान ना करें, अगर आप पूरी रात इबादत नहीं कर सकते तो ईशा की नमाज पढ़कर आराम करें, फिर सुबह होने पर फजर की नमाज जमात के साथ पढ़ें, उसे पूरी रात का सवाब मिलेगा।
जो शख्स पूरी रात इबादत करके सुबह फजर की नमाज जमात के साथ अदा न करें तो उसकी पूरी रात की इबादत का कोई फायदा नहीं । गजरौला शिव जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती गयासुद्दीन ने कहा कि इस रात को हलवा करना व आतिशबाजी छोड़ना गलत, शरीयत के खिलाफ है।
इस रात मुसलमान नफिल नमाजे, कुरान पाक व तस्वीहात पढ़ें। शब-ए-बरात के 15 दिन बाद रमजान का महीना आता है। रमजान के महीने में मुसलमान पूरे महीने रोजे रखते हैं, तस्बीह पढ़ते हैं। अल्लाह का जिक्र करते हैं । शब के माना रात बरात के माना बरी होने को कहते हैं। संवाद