गवाहों से जिरह सात को होगी
बिजनौर। एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना खातून की हत्या के सनसनीखेज मामले में परिजनों को पांच साल बाद भी न्याय का इंतजार है। गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में कुख्यात मुनीर का हाथ सामने आया था और वह तिहाड़ जेल में बंद है। दूसरा आरोपी रैय्यान बिजनौर जेल में बंद है।
वैगनआर कार में सवार एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद अपनी पत्नी फरजाना खातून की दो अप्रैल 2016 की रात उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब ये दोनों बेटी जिमनिश (15) व बेटे शहबाज (12) के साथ स्योहारा में अपनी चचेरी बहन की शादी में शामिल होने के बाद सहसपुर लौट रहे थे। रास्ते में पुलिया पर बाइक सवार दो युवकों ने तंजील अहमद की गाड़ी के पास बाइक रोक कर तंजील अहमद व उनकी पत्नी पर पिस्टल से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। पति, पत्नी पर करीब 20 गोली दागी गईं थी। तंजील अहमद को मुरादाबाद के कॉसमॉस अस्पताल ले जाया गया। वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पत्नी फरजाना खातून को दिल्ली के फोर्टिस में भर्ती किया गया। 13 अप्रैल को दिल्ली में उपचार के दौरान फरजाना की भी मौत हो गई। इस घटना की तंजील अहमद की कार के पीछे आ रहे उनके भाई रागिब मसूद ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस हत्याकांड में मुख्य अभियुक्त के रूप में शातिर अपराधी सहसपुर के मुनीर व उसके साथी रैय्यान का नाम सामने आया था। इन दोनों के अलावा जैनी, तंजीम, रिजवान की भी संलिप्तता पाई गई थी। पांचों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी। यह मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर तीन में चल रहा है। इस मामले में दो महत्वपूर्ण गवाह तंजील के भाई रागिब मसूद व हसीब अहमद के बयान हो चुके हैं। दोनों ने तंजील व उसकी पत्नी पर मुनीर व रैय्यान के गोली चलाने की बात कही है। मुनीर व रैय्यान को जमानत नहीं मिली है। जैनी, तंजीम व रिजवान जमानत पर हैं।
पढ़ाई के दौरान ही अपराध करने लगा था मुनीर
बिजनौर। इस मामले में आतंकवादियों का हाथ होने से लेकर स्थानीय बदमाशों के गिरोह सहित कई बिंदुओं पर जांच की गई। स्थानीय पुलिस के अलावा एसटीएफ और एनआईए की भी मदद ली गई। बाद में मुनीर को एसटीएफ ने नोएडा से दबोचा था। मुनीर ने साल 2009 में अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में प्रवेश के लिए गया था। वहां उसकी मुलाकात आशुतोष मिश्रा, शाहदाब, अतीउल्ला व सऊद से हुई थी। वहीं से मुनीर अपराध जगत में सक्रिय हो गया। मुनीर व उसके साथियों के खिलाफ लूट व हत्या के मुकदमे दर्ज हुए। मुनीर अलीगढ़ पुलिस से बचने के लिए दिल्ली के बाटला हाउस में किराए के मकान में रहने लगा था।
रकम और फ्लैट वापस न किए जाने पर बिगड़े थे संबंध
तंजील अहमद शाहीन बाग जामियानगर दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहते थे, जहां मुनीर व तंजील अहमद में जान पहचान हो गई। तंजील अहमद मुनीर व उसके साथियों की मदद करते थे। मुनीर को दिल्ली में फ्लैट में हथियारों की भी जरूरत थी, उसने तंजील से बात की तो उन्होंने कहा कि इसके लिए पैसों की जरूरत होगी। मुनीर ने अपने साथी आशुतोष मिश्रा के साथ मिलकर साल 2014 में कमलानगर दिल्ली में यश बैंक के गार्ड को गोली मारकर डेढ़ करोड़ रुपये लूट लिए थे। उसने तंजील अहमद को 60 लाख रुपये फ्लैट व हथियार के लिए दिए थे। आशुतोष मिश्रा को अलीगढ़ की एसओजी ने दबोचा तो मुनीर ने तंजील अहमद से आशुतोष को छुड़ाने को कहा। तंजील अहमद ने मना कर दिया। मुनीर ने 2015 में अपने साथी सऊद के साथ पीएनबी के गार्ड की गोली मारकर हत्या कर 91 लाख रुपये लूट लिए। 22 लाख रुपये तंजील को फ्लैट व हथियार के लिए दिए। मुनीर ने उन्हें वापस मांगा तो तंजील ने धमकी दी कि वह फ्लैट व रुपये के बारे में भूल जाए। इसी विवाद में हत्या की गई थी।
स्योहारा क्षेत्र के सहसपुर के एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद की हत्या के बाद जांच करती पुलिस। (फ?- फोटो : BIJNOR