बिजनौर। फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश वीके वासवानी ने फिरौती के लिए अपहरण के 26 साल पुराने केस का निस्तारण करते हुए सात आरोपियों को आजीवन कारावास व 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस मामले को एक साल पहले फास्ट ट्रैक कोर्ट में सौंपा गया था।
शासकीय अधिवक्ता सलीम अख्तर के अनुसार थाना नहटौर के गांव खंडसाल निवासी सीतम सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके गांव खंडसाल में नहटौर-नूरपुर रोड पर स्थित निर्माणाधीन क्रेशर में 30 नवंबर 1993 को उसका छोटा भाई प्रीतम व उसका साला राजीव निवासी उमरी बढ़ी सो रहे थे। रात करीब दस बजे वहां पांच आदमी आए, जिसमे तीन के पास बंदूक थीं। एक के पास डंडा व तबल था। रास्ता पूछने के बहाने वे दोनों को अपने साथ गांव दबथला के पास समाधि के पास ले गए। वहां प्रीतम को एक चिट्ठी दी व राजीव कुमार को अपने साथ ले गए। प्रीतम सिंह ने घर आकर बताया कि राजीव के लिए बदमाशों ने 50 हजार रुपये की फिरौती मांगी है। 40 हजार रुपये लेकर सौदा तय हुआ और राजीव कुमार को बदमाशों ने छोड़ा।
इस मामले में यह भी कहा गया कि बलवीर सिंह का क्रेशर रोहताश चला रहा था। प्रीतम सिंह का कहना था कि उसका क्रेशर बनने से रोहताश सिंह के क्रेशर पर असर पड़ता। इसलिए ही रोहताश सिंह के कहने पर अपहरण कराया गया था और फिरौती वसूली गई थी। इस मामले में रोहताश सिंह निवासी भटीयाना, केवल सिंह व रमेश सिंह निवासी हसुपुरा के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस मामले में अभियुक्त पाले व महीपाल से पुलिस ने फिरौती की रकम के कुछ नोट बरामद किए थे। पुलिस ने गांव हसुपुरा के रमेश उर्फ दाना, केवल, पाले, चंद्रे, गांव सादपुरी के महीपाल व रामपाल तथा गांव भटीयाना के रोहताश सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।