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Bijnor News: सफाई और नाला खोदाई में खेल पर कंसल्टिंग इंजीनियर की सेवा समाप्त

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बिजनौर। गांव के विकास को सरकार भारी भरकम बजट मुहैया कराती है मगर सरकारी धन हड़पने के लिए गड़बड़ी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नींदडू ग्राम सभा के दामन पर अब फिर से दाग लगा है। दरअसल नाला खोदाई और सफाई में खेल कर दिया गया है। इस मामले में धामपुर ब्लॉक के कंसल्टिंग इंजीनियर की सेवा समाप्त कर दी गई है। वहीं पंचायत सचिव को नोटिस जारी किया गया है।

पंचायत की ओर से कराए गए कार्यों के संबंध में शिकायत की गई थी। मामले में प्रशासन ने जांच की तो शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए गए। जिसमें करीब दो लाख 18 हजार रुपये से सफाई होना दिखाया गया। इस मामले में पंचायत का कामकाज संभाल रही तीन सदस्यीय कमेटी और पंचायत सचिव ने कोई फोटो या वीडियो मुहैया नहीं कराई। जिससे यह साफ हो सके कि सफाई कहां और कैसे हुई है। जिससे जांच टीम सफाई कार्य का सत्यापन नहीं कर सकी।
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इसके अलावा पक्की तालाब वाली पुलिस से नहर तक नाला खोदाई के नाम पर करीब एक लाख 86 हजार रुपये का खर्च दिखाया गया। इस काम की माप पुस्तिका कंसल्टिंग इंजीनियर ने तैयार की थी। माप पुस्तिका को प्रमाणित करने में तीन सदस्यीय कमेटी और पंचायत सचिव को भी दोषी माना गया। इस काम में करीब एक लाख 36 हजार रुपये का गबन होना जांच टीम ने बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कंसल्टिंग इंजीनियर दिवाकर सिंह का अनुबंध समाप्त कर दिया गया है। वहीं गबन की रकम को तीन सदस्यीय कमेटी और पंचायत सचिव से रिकवरी करने की तैयारी चल रही है।

- पहले भी निकल चुकी है छह लाख की रिकवरी
नींदड़ू पंचायत में गबन का मामला ताजा नहीं है। इससे पहले 17 अक्तूबर 2023 को रफीक मलिक और खुर्शीद मलिक ने शिकायत की थी। जांच में दोषी मिलने पर फरवरी 2024 को डीएम ने ग्राम प्रधान हबीबा पत्नी राहत को निलंबित कर दिया। साथ ही छह लाख की रिकवरी निकाली थी। इसके बाद 24 जून 2024 को पंचायत के कामकाज का जिम्मा तीन सदस्यीय कमेटी के हवाले कर दिया गया था। उक्त कमेटी में निलंबित की गई ग्राम प्रधान की भतीजी समेत दो अन्य शामिल हैं।
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वर्जन :
नाला खोदाई और सफाई के काम में अनियमितता मिलने पर कंसल्टिंग इंजीनियर के सेवा अनुबंध को समाप्त कर दिया गया है। सचिव को नोटिस जारी किया गया है। रकम की वसूली भी की जाएगी। इस पंचायत की प्रधान पहले ही निलंबित कर दी गई थीं। अब तीन सदस्यीय कमेटी पर जिम्मेदारी है। - दमनप्रीत अरोड़ा, डीपीआरओ
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