इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने कहा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सत्ता की शक्ति का दुरुपयोग कर विपक्षी प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने से रोकने के आरोप वास्तव में काफी गंभीर हैं। यदि यह सही है तो इसका अर्थ है स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की संविधान की मंशा का वास्तव में माखौल उड़ाया गया है। हाईकोर्ट ने खंडपीठ ने यह टिप्पणी बिजनौर के पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार उदयवीर सहित चार अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचीगण के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया गया है, जिस पर रोक लगाने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।
मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति अमर सिंह चौहान की पीठ ने याचीगण की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। याचिका पर बहस कर रहे वकीलों ने एक स्वर में कहा कि सत्ता पक्ष अपने समर्थित उम्मीदवारों को निर्विरोध चुनाव जिताने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र कर रहा है। विपक्षी उम्मीदवारों को डरा धमका कर उनका नामांकन वापस कराया जा रहा है। जो लोग नामांकन वापस नहीं ले रहे उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे कायम किए गए हैं।
याची के खिलाफ अपहरण का झूठा केस दर्ज कराया गया है जबकि अपह्त व्यक्ति ने स्वयं सीजेएम बिजनौर के समक्ष हलफनामा दाखिल कर कहा है कि उसका अपहरण नहीं किया गया है।
खंडपीठ ने कहा कि फिलहाल वह इन आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाल रहे हैं, मगर यदि वास्तव में ऐसा हुआ है और आरोप सही पाए जाते हैं तो इसका मतलब है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने की मंशा असफल रही है।