बिजनौर। अतिरिक्त न्यायालय के न्यायाधीश आरए कौशिक ने सात लाख 25 हजार का चेक बाउंस के मामले में आरोपी सतेंद्र कुमार को छह माह के कारावास व दस लाख 75 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माने की धनराशि वसूल होने पर उसमें से दस लाख 50 हजार रुपये परिवादी यतेंद्र कुमार को क्षति पूर्ति के रूप में अदा किए जाने के आदेश दिए।
बिजनौर के मोहल्ला वैदिक विहार निवासी यतेंद्र कुमार देवरा ने न्यायालय में दाखिल परिवाद में कहा था कि सतेंद्र कुमार उसके मौसेरे भाई हैं और वे ठेकेदारी का भी काम करते हैं। उसके और सतेंद्र के बीच पैसों का लेनदेन होता रहता था। दिसंबर 2012 में सतेंद्र कुमार ने कहा कि उत्तराखंड सरकार में राज्य में निर्माण के संबंध में बड़े सरकारी ठेके मिल रहे हैं। उसके लिए आठ लाख रुपये की आवश्कता है। उसने दिसंबर 2012 से जून 2013 के बीच प्रदीप सेंगर, संदीप कुमार और विश्वेंद्रवीर सिंह के सामने सात लाख 25 हजार रुपये सतेंद्र को दिए। उसने 15 अगस्त 2013 तक पैसे वापस करने का वायदा किया था। लेकिन सतेंद्र ने धनराशि वापस नहीं की ओर एक सितंबर 2013 को पंजाब नेशनल बैंक धामपुर शाखा का सात लाख 25 हजार रुपये का चेक हस्ताक्षर कर उसे दिया और एक-डेढ़ माह में खाते में जमा करने को कहा। उसने 28 नवंबर 2013 को चेक भुगतान के लिए पंजाब एंड सिंध बैंक बिजनौर शाखा में अपने खाते में जमा किया। सतेंद्र के खाते में पर्याप्त धनराशि जमा न होने से चेक बाउंस हो गया। इस मामले में सतेंद्र कुमार का कहना था कि उसने यतेंद्र से कोई पैसा उधार नहीं लिया है।
इस मामले में अपने निर्णय में अदालत ने कहा है कि अपने खाते का हस्ताक्षरित किया गया चेक परिवादी को दिया गया है, जो पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हुआ है। कोर्ट ने सतेंद्र कुमार को चेक बाउंस का दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।