गेहूं की पछेती प्रजाति का चयन कर लें अच्छी पैदावार
बिजनौर। आधा दिसंबर बीतने के बाद सर्दी का प्रकोप अब बढ़ने लगा है। आमतौर पर गेहूं की बुवाई के लिए 15 दिसंबर तक का समय ही उपयुक्त माना जाता है लेकिन किसान बाद तक गेहूं बोते रहते हैं। ऐसे में अच्छा उत्पादन लेने के लिए उन्नत प्रजाति के बीज भी बाजार में उपलब्ध है। किसान इन पछेती प्रजाति को बोकर अच्छी पैदावार ले सकते हैं।
जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर जमीन में गेहूं बोया जाता है। अभी जिले में आधे दिसंबर तक करीब 72 हजार हेक्टेयर जमीन में ही गेहूं बोया गया है। अभी काफी रकबे में गेहूं की फसल बोई जानी है। अब तापमान गिरने लगा है और ज्यादा ठंड में गेहूं का जमाव और उत्पादन प्रभावित होता है। गेहूं का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को खेतों में एचडी 3059, पीबीडब्ल्यू 550 उन्नत, डब्ल्यूएच 1124, डीबीडब्ल्यू 173 प्रजाति के बीज बो सकते हैं। ये सभी गेहूं की पछेती प्रजाति हैं और इनकी बुवाई पूरे दिसंबर की जा सकती है। इनकी औसत पैदावार 40 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहती है।
पछेती प्रजाति से होगा फायदा
कृषि वैज्ञानिक डॉ.केके सिंह के अनुसार पछेती प्रजाति 120 से 140 दिन में तैयार हो जाती हैं जबकि अगेती प्रजाति की फसल पकने में 140 से 150 दिन का समय लेती हैं। ऐसे में पछेती प्रजाति की फसल अगेती के साथ ही तैयार हो जाती है।
समय से तैयार होगी फसल
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र के अनुसार अब गेहूं बोने वाले किसान पछेती प्रजाति का ही बीज बोएं। पछेती प्रजाति की फसल समय से तैयार होगी और उत्पादन भी अच्छा रहेगा। कृषि विभाग के बीज भंडार केंद्रों पर किसानों को बीज दिया जा रहा है और इस पर अनुदान भी मिल रहा है।