तीन साल में एक बार मिलता है फसल का बीज
बिजनौर। कृषि विभाग से मिलने वाली फसल की अच्छी प्रजाति के बीजों को लेने के लिए किसान कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। एक ही किसान के नाम पर एक ही फसल का बीज तीन साल में एक बार जारी हो सकता है। अगर फिर भी किसान को सब्सिडी लेनी है तो वह दूसरे किसानों के कागज विभाग में लगाकर सब्सिडी लेते हैं।
उन्नत बीजों को बोकर ही किसान फसलों की अच्छी पैदावार ले सकते हैं। अच्छी पैदावार के लिए कृषि विभाग में किसानों को सब्सिडी पर बीज उपलब्ध कराए जाते हैं। किसानों को गेहूं, धान, बाजरा, मसूर, सरसों, तोरई आदि का बीज दिलाया जाता है। बीज दो तरह के होते हैं आधारित और प्रमाणित। आधारित बीज वैज्ञानिकों की देखरेख में तैयार होते हैं। इसे बोने पर किसान को सब्सिडी तीन साल बाद मिलती है। आधारित बीज से तैयार फसल के बीज को खेत में तीन साल तक बोया जा सकता है। प्रमाणित बीज कृषि विभाग की के फार्म हाउस पर तैयार होते हैं। इसकी फसल के बीज को एक साल बाद तक बोया जा सकता है। इस पद्घति को अपनाने पर फसल उत्पादन कम नहीं होता है।
प्रमाणित बीज की सब्सिडी एक साल बाद किसानों के खातों में आती है। एक किसान जमीन के आधार पर सभी प्रजातियों या किसी एक प्रजाति के दो हेक्टेयर के रकबे में बोया जाने वाला बीज ले सकता है। अगर कोई किसान इससे ज्यादा बीज लेता है तो उसे या तो सब्सिडी छोड़नी होती है या फिर किसी और किसान के नाम से बीज खरीदता है। बाद में सब्सिडी दूसरे किसान के खाते में आती है जो पहले किसान को लौटा दी जाती है। कई बार फसलों के बीज न बिकने पर कृषि विभाग के कर्मचारी ही बड़े किसानों को किसी तरह बीज बेचते हैं। किसान चाहे उसे जिस नाम पर ले। आम किसान कृषि विभाग की दुकानों से बीज लेने को जागरूक नहीं होता है।
नियम के अनुसार बंट रहा बीज
जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र के अनुसार सभी किसानों को आधारित व प्रमाणित बीज जरूर बोने चाहिए। दुकानों से नियम के अनुसार ही बीज बंटवाया जा रहा है।