बिजनौर में डीएम ने मनमानी फीस वसूलने वाले सीबीएसई व आईसीएसई स्कूलों पर शिकंजा कस दिया है। अब स्कूल संचालक किसी विशेष दुकान से ड्रेस व स्टेशनरी खरीदने आदि का दबाव नहीं डाल सकेंगे। यदि छात्रों के उत्पीड़न की शिकायत मिली तो स्कूल संचालकों को जेल जाना पड़ेगा।
डीआईओएस एके दुबे के अनुसार जिले के मान्यता प्राप्त सीबीएसई व आईसीएसई स्कूलों के प्रधानाचार्यों की बैठक विकास भवन में हुई, जिसमें जिले के 70 स्कूलों के प्रधानाचार्य मौजूद रहे। प्रधानाचार्य को शुल्क निर्धारण, पुस्तक, लेखन सामग्री, ड्रेस आदि स्कूलों द्वारा नहीं बेचे जाने और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियम 2009 की जानकारी दी गई। डीएम जगतराज ने डीआईओएस को निर्देश दिए कि वह इस बारे में शासनादेश को प्रधानाचार्य व एसडीएम को उपलब्ध करा दें।
डीएम ने सख्ती के साथ कहा कि कोई भी प्रधानाचार्य किसी निश्चित दुकान से ड्रेस, स्टेशनरी, किताब खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। स्कूल ड्रेस को पांच साल से पहले संस्था परिवर्तित नहीं करेंगी। इसके बाद यदि ड्रेस को बदला जाता है तो विद्यालय प्रधानाचार्य एक साल पहले अभिभावकों को जानकारी देंगे। संस्था स्कूलों में बोर्ड से मान्यता प्राप्त कोर्स ही पढ़ाएंगे।
कोर्स में स्वत: कोई परिवर्तन नहीं करेंगे। परिवर्तन की सूचना डीएम की अध्यक्षता में गठित शैक्षिक विवाद निस्तारण समिति को दी जाएगी। स्कूल फीस की रसीद देंगे। डीएम ने 15 दिन के अंदर शिक्षक अभिभावक संघ अर्थात पीटीए का गठन करने की कड़ी हिदायत दी है।
दुबे के अनुसार यदि प्रधानाचार्य आदेश का पालन नहीं करेंगे तो जेल भेजा जा सकता है। एडीएम प्रशासन मदन सिंह गर्ब्याल, बीएसए महेश चंद मौजूद रहे।