जान पर खेलकर बचा रहीं दूसरे की जिंदगी
बिजनौर। आज हम अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मना रहे हैं। नर्स मसीना से कम नहीं। रोज कोरोना जैसे खतरे का सामना करती हैं और फिर भी बिना डरे अपने सिस्टर होने के फर्ज को निभा रही हैं। यहीं नहीं इसके अलावा परिवार को संभालना, खुद को स्वस्थ रखने जैसी चुनौती का सामना भी निडर होकर कर रही हैं।
नौकरी और सेवा दोनों करनी है: रजनी शर्मा
हमारे लिए चुनौती तो है कि यहां कोरोना का खतरा ज्यादा रहता है। मरीज आते हैं, लेकिन हमें उनकी देखभाल और दवा समय पर देनी होती है, जबकि शुरुआत में हमें मालूम ही नहीं होता कि वह किस बीमारी से पीड़ित हैं। हम अपना फर्ज ईमानदारी से निभा रहे हैं, इसी में तसल्ली मिलती है।
पहले कोविड को हराया, अब कर रही सेवा
सिस्टर जसकरण कौर एक बार कोविड की चपेट में आ चुकी हैं। उन्होंने पहले कोरोना से जंग जीती और फिर मरीजों की सेवा में दोगुनी ऊर्जा के साथ जुट गई। सिस्टर जसकरण कौर कहती हैं कि मेरे लिए खुद को स्वस्थ रखने के साथ मरीजों की देखभाल करना चुनौती जरूर है, लेकिन मैं अपनी पूरी जिम्मेदारी ईमानदारी से पूरी करती हूं।
तमाम चुनौतियां, पर डरना कैसा
जिला अस्पताल में तैनात सिस्टर पद्मा कहती हैं कि चुनौतियां तो हैं, लेकिन हमने इसी की ट्रेनिंग ली है। हमे मरीजों की देखभाल करना सिखाया गया है। फिर चाहे चुनौती कितनी ही बड़ी हो, हर चुनौती का सामना करना हमारा फर्ज है।
प्रशिक्षण में यही सिखाया जाता है
सिस्टर लक्ष्मी कहती हैं कि हमें प्रशिक्षण में यही सिखाया जाता है कि मरीज की देखभाल आखिरी उम्मीद तक करनी होती है। हम पूरी सिद्दत से मरीज की देखभल और समय से दवा का ध्यान रखते हैं। यही हमारा काम है।
कोरोना ने चुनौती बढ़ाई, पर हम डरेंगे नहीं
सिस्टर सुदेश कहती हैं कि कोरोना के कारण मरीजों की संख्या बढ़ी है, पर हम डरेंगे नहीं। हम अपनी पूरी मेहनत करते हैं कि मरीज ठीक होकर वापिस जाए। इसके लिए ही तो हमने इस पेशे को चुना था कि नौकरी के साथ-साथ मानव सेवा का मौका भी मिले।
इसलिए मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस
हर साल अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस 12 मई को फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन की सालगिरह मनाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर के समाज में नर्सों द्वारा किए गए योगदान को भी मनाता है। इस दिन इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्सेज संगठन हर साल एक अलग विषय के साथ विश्व स्तर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को शिक्षित और सहायता करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय नर्स किट का उत्पादन करता है।
उम्मीद से ज्यादा वर्कलोड, फिर भी चेहरे पर हंसी
जिला अस्पताल में नियम तो है कि हर आठ मरीज पर एक सिस्टर होनी चाहिए। पद भी करीब 18 हैं, पर तैनाती की बात करें तो आठ ही कार्यरत हैं। हालांकि कुछ नर्स संविदा पर है तो थोड़ी राहत जरूर मिली है। हालांकि तीन शिफ्ट होने से मरीजों और नर्स का मानव गड़बड़ा जाता है। वहीं मरीजों की संख्या बढ़ने से एक-एक नर्स को 30 से 40 मरीज तक देखने पड़ रहे हैं।