प्रधानी के लिए संतराम ने छोड़ी सरकारी नौकरी
बिजनौर। ग्राम प्रधान बनने के लिए एक शिक्षक ने 26 साल पुरानी सरकारी नौकरी छोड़ दी। शिक्षक कई साल से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। वह जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने की भी तैयारी में था, लेकिन बसपा से हरी झंडी नहीं मिलने पर उसने कदम पीछे खींच लिए। शिक्षक अपनी बेटी को ब्लॉक प्रमुख बनाना चाहता है। इसके लिए उसने अपनी बेटी को क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर मैदान में उतारा है।
मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक के गांव किशनपुर निवासी संतराम सिंह कई सालों से बसपा में सक्रिय हैं। वे 1995 से बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक रहे। प्राथमिक विद्यालय छकड़ा में वे प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात थे। उनकी बेटी डॉ. मधु जिला पंचायत की पिछली बार सदस्य थीं। संतराम सिंह वैसे तो कई सालों से ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन पिछले दिनों उनका इरादा जिला पंचायत के वार्ड सदस्य का चुनाव लड़ने का रहा। उन्होंने बसपा से प्रत्याशी बनाने के लिए जोड़तोड़ भी की, लेकिन बसपा ने उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया।
गांव किशनपुर का प्रधान बनने के लिए संतराम सिंह ने पिछले दिनों सरकारी नौकरी छोड़ दी और चुनाव मैदान में कूद पडे़। ग्राम प्रधान की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। संतराम सिंह ने इसलिए ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने को ताल ठोकी है। वे पूरी तैयारी के साथ चुनाव मैदान में कूद पडे़ हैं। संतराम सिंह का सपना अपनी बेटी मधु को मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक का ब्लॉक प्रमुख बनाने का है। ब्लॉक के चुनाव पर भी उनकी पूरी नजर है। उन्होंने बेटी को बीडीसी सदस्य पद के लिए चुनाव मैदान में उतारा हैं। संतराम सिंह अपने चुनाव के साथ बेटी का चुनाव भी लड़ा रहे हैं। उन्हें सरकारी नौकरी छोड़ने का मलाल नहीं है। वे कहते हैं कि राजनीति के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ने का कदम उठाया है। 26 साल तक उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी विद्यालय में शिक्षण कार्य किया।