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इंसानियत जिंदा रखने के लिए दीं कुर्बानियां

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नजीबाबाद की जोगीरम्पुरी दरगाह पर मजलिस को खिताब करते मौलाना उरूज जौनपुरी। - फोटो : NAZIBABAD
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नजीबाबाद। मुश्किल कुशा मौला अली की सदाओं के साथ जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर में मातमी मजलिसों और जुलूस बरामद होने का सिलसिला जारी रहा।
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दरगाह-ए-आलिया नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह के शम्सुल हसन हॉल से मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना उरूज जौनपुरी ने फरमाया कि करबला का मसला अली उल्ला-वली उल्ला तक सीमित नहीं है, हुसैन ने अपने बेटों का नाम भी अली दिया। वाक्याते करबला अली से शुरू होकर अली पर ही खत्म होता है। हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने करबला की जंग में इस्लाम और इंसानियत को जिंदा रखने में बेशकीमती कुर्बानियां दीं। उन्होंने तकनीकी शिक्षा पर भी काम करने के लिए कहा। मातमी मजलिसों को दूसरे दिन हाफिज सैय्यद जैगमल गरवी, मौलायी हसन इमाम, मौलाना तसनीम हैदर, मौलाना हैदर मौलायी सहित अनेक शिया विद्वानों ने खिताब किया।
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जुलूस और मजलिसों से गमगीन है दरगाह परिसर
नजीबाबाद। दरगाह आलिया नजफे हिंद जोगीरम्पुरी परिसर में दूसरे दिन मातमी जुलूसों, नोहा ख्वानी, मर्सिया ख्वानी और मातमी मजलिसों से गमगीन रहा। जुलजना के मातमी जुलूस के साथ अंजुमनों ने छुरियों का मातम, सीनाजनी की। दरगाह परिसर में कई अंजुमनों की ओर से वाक्याते करबला से संबंधित मंजर सजाए गए हैं। उधर दरगाह परिसर में मुख्य रोजा, सैय्यद राजू की मजार सहित अकीदे के स्थानों पर जायरीन नम आंखों से जियारत कर मन्नतें मांग रहे हैं।

नजीबाबाद के जोगीरम्पुर दरगाह परिसर में छुरियों का मातम करते अंजुमन सदस्य।- फोटो : NAZIBABAD

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