बिजनौर के मोहल्ला शक्तिनगर में एक मकान से रसल बाइपर सांप को पकड़ते वन विभाग के कर्मचारी। स्रोत
बिजनौर। जिले में गुलदार के बाद अब सांप भी बड़ी समस्या बन गए हैं। सबसे जहरीले सांपों की श्रेणी में आने वाले किंग कोबरा, रसल वाइपर जैसे सांप जिला मुख्यालय तक पहुंच गए। बृहस्पतिवार को बिजनौर की शक्तिनगर कॉलोनी में एक घर से रसल वाइपर को रेस्क्यू किया गया, वहीं नहटौर के चांदपुर चुंगी के पास घर में कोबरा घुस गया। रेहड़ के बादीगढ़ में घर में अजगर घुस गया।
कुछ साल पहले तक जिला मुख्यालय पर सांप तो मिलते थे, लेकिन ज्यादातर विषहीन श्रेणी के होते थे। अब जहरीले सांप भी बस्ती क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। बृहस्पतिवार को शक्तिनगर कॉलोनी में लोकेंद्र सिंह के मकान में रसल वाइपर सांप घुस गया। वन विभाग की टीम ने उसे रेस्क्यू किया। रेंजर महेश गौतम ने बताया कि पिछले 30 दिनों में ही 15 रसल वाइपर शहर के अंदर से ही पकड़े जा जा चुके हैं। उधर रेहड़ के गांव बादीगढ़ में बुधवार की रात साढ़े आठ बजे गांव निवासी आलोक सिंह के घर खेतों से निकलकर एक अजगर आ गया। पानी लेने गए परिजन नल के पास अजगर को देख भयभीत हो गए। सूचना पर वन विभाग की टीम ने अजगर को पकड़कर गादला बीट में छोड़ दिया। नहटौर में चांदपुर चुंगी के निकट स्थिति आनंद सैनी के मकान की रसोई में कोबरा सांप घुस गया। गृह स्वामी ने सर्पमित्र बी.भास्कर को बुलाया। उन्होंने सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। सर्व मित्र बी.भास्कर ने बताया कि पकड़ा गया सांप कोबरा प्रजाति का था। यह दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से एक है।
वहीं पिछले सप्ताह आवास विकास कॉलोनी के अंदर एक गाड़ी से अजगर को पकड़ा था। इससे पहले इस साल शहर से ही किंग कोबरा भी पकड़ा जा चुका है। बिजनौर जिले में 14 प्रजातियों के सांप : जिले में सांप की 14 प्रजाति पाई जाती हैं। मगर इनमें से चार प्रजाति के सांप ही विषैले होते हैं इनमें किंग कोबरा, कोबरा, कॉमन क्रेट, रस्सल्स वाइपर विषैले सांप हैं। यह चारों शहर में देखे जा रहे हैं। इनके अलावा कॉमन कैट स्नेक कुछ कम विषैला है। ब्राह्मनी वर्म स्नेक, कॉमन वुल्फ स्नेक, चैकर्ड कीलबैक, स्ट्राइप्ड कीलबैक, इंडियन रैट स्नेक, कॉमन ट्रिंकेट स्नेक, कॉपर-हेडेड ट्रिंकेट स्नेक, कौलर्ड ब्लैक-हैडेड स्नेक, बर्मीज पाइथन विषहीन सांप हैं, जो सभी क्षेत्रों में देखे जाते हैं।