बिजनौर में वित्तीय वर्ष 2016-17 के आखिरी महीने में रसोई गैस के सिलेंडर की कीमत 86 रुपये बढ़ाई गई है। हालांकि एलपीजी सिलेंडर के दाम में इतनी बड़ी वृद्धि होने के बाद भी इसका आम उपभोक्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। देखा जाए तो वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत में केवल 2.86 रुपये की ही बढ़ोतरी हुई है।
हर महीने की पहली या आखिरी तारीख को सिलेंडर के मूल्यों में परिवर्तन होता है। घरेलू सिलेंडर और कामर्शियल सिलेंडर दोनों के रेट बदल जाते हैं। रेट बढ़ने या कम होने के साथ ही सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी में भी उसी दर से अंतर आता है। जो उपभोक्ता सब्सिडी लेते हैं, उनके खाते में सब्सिडी की राशि आ जाती है। ऐसे उपभोक्ताओं के बजट पर सिलेंडर के मूल्य बढ़ने या कम होने का कुछ खास फर्क नहीं पड़ता है। हालांकि जिन उपभोक्ताओं को सब्सिडी नहीं मिलती या जिन्होंने सब्सिडी छोड़ी है, उनका बजट प्रभावित होता है।
और यह रहा कीमत का गणित
महीना मूल्य सब्सिडी वास्तविक मूल्य
अप्रैल 538.50 112.87 425.63
मई 557 131.35 425.65
जून 578 152.32 425.68
जुलाई 570 142.34 427.66
अगस्त 504 77.41 426.59
सितंबर 483 54.44 428.56
अक्तूबर 505 74.41 430.59
नवंबर 544.50 110.36 434.14
दिसंबर 599 162.79 436.21
जनवरी 600.50 162.29 438.21
फरवरी 666.50 228.20 438.30
मार्च 752.50 324 428.50
घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा फर्क
जिले में करीब चार लाख कनेक्शन धारक हैं। इनमें से दस प्रतिशत से भी कम उपभोक्ताओं ने अपनी सब्सिडी छोड़ी है। ऐसे में गैस की कीमतें बढ़ने या कम होने का जिले के उपभोक्ताओं पर असर नहीं पड़ता है।
कॉमर्शियल सिलेंडर हुए महंगे
गरेलू उपभोक्ताओं पर भले कीमत में बढ़ोतरी का कोई खास असर नहीं पड़ा हो, लेकिन गैस एजेंसियों
का मुख्य फोकस कामर्शियल सिलेंडर पर मूल्य बढ़ाने पर है। इसके चले कॉमर्शियल सिलेंडर का उपयोग करने वालों को अच्छी-खासी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा है। इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत में कामर्शियल सिलेंडर की कीमत 1076.50 रुपये थी। यह वित्त वर्ष के खत्म होते-होते 1439.50 रुपये पर पहुंच गई है।