बिजनौर। यूं तो सड़क हादसों में कमी लाने के लिए तमाम प्रयास किए जाते हैं। मगर मौत का सिलसिला थमता नजर नहीं आता। इस साल के 173 दिनों में हुए 316 हादसों में 216 लोगों ने अपनी जान गंवा दी जबकि 242 लोग घायल हुए। कहीं यातायात नियमों की अनदेखी तो कहीं ब्लैक स्पॉट काल बनकर मौत का झपट्टा मार रहे हैं।
जिले में 3500 किलोमीटर से अधिक सड़कों का जाल है। दो फोरलेन हाईवे, एक टू लेन और दो स्टेट हाईवे भी हैं। सड़कों के बेहतर बनने के साथ साथ भी वाहनों की रफ्तार भी बढ़़ी है। मगर रफ्तार के साथ साथ सड़क हादसों का ग्राफ भी बढ़ रहा है। हर रोज कहीं ना कहीं से हादसे में मौत की बुरी खबर सुनने को मिल जाती है।
साल 2024 में भी हुई थी 389 मौत : 2024 में 670 जगहों पर सड़क हादसे हुए, इनमें 389 लोगों की जान चली गई थी जबकि 655 लोग घायल हुए। जिन्हें इलाज देने के बाद मुश्किल से बचाया जा सका था। इस साल 2025 में भी जनवरी से 23 मई तक 316 हादसे हो चुके हैं। इनमें 216 लोगों की मौत हुई जबकि 242 लोग घायल हुए।
ये 10 ब्लैक स्पॉट हैं बेहद खतरनाक : जिले में कुल 10 ब्लैक स्पॉट हैं। ज्यादा हादसों की वजह से इन जगहों को ब्लैक स्पॉट की श्रेणी में रखा गया है। इनमें नेशनल हाइवे पर पांच, स्टेट हाईवे पर चार और अन्य जिला मार्ग पर एक ब्लैक स्पॉट है।
यहां संभलकर निकलना जरूरी : नेशनल हाईवे पर भूतपुरी तिराहा, अकबराबाद, सिकंदपुर, धामपुर में दुर्गा विहार कॉलोनी कट, गुनियापुर के आस पास आधा किलोमीटर तक ब्लैक स्पॉट हैं। वहीं स्टेट हाईवे पर चांदपुर में हरपुर मोड़, नूरपुर में असगरीपुर, हल्दौर का पैजनिया चौराहा, खासपुरा और नहटौर के गांव फुलसंदा में संभलकर निकलना जरूरी है।