-गंगा खादर इलाके में बाढ़ का पानी भरने से जलमग्न खेत, चारे का संकट गहराया
-जलस्तर बढ़ने की वजह से गंगा के उस पार से चारा नहीं ला रहे लोग
- दिनभर बादलों के बरसने से मौसम में घुली ठंडक, गर्मी से मिली निजात
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। भले ही सावन सूखा चला गया मगर, भादो में जमकर बारिश हो रही है। पहाड़ और मैदानी इलाकों में बादलों के बरसने से नदियों में उफान है। गंगा की धारा खतरे के निशान को छूकर बह रही है। जलस्तर में इजाफा होने से गंगा खादर इलाके में फसल जलमग्न हैं। खादर में चारे का संकट भी गहरा चुका है।
बिजनौर बैराज पर सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 219.40 मीटर बना हुआ था, जोकि शाम ढलने तक यानि छह बजे 219.50 मीटर पर पहुंच गया। सुबह के मुकाबले में पानी में सात हजार क्यूसेक का इजाफा और बैराज पर गंगा में 79567 क्यूसेक पानी बहने लगा।
बता दें कि बिजनौर बैराज पर खतरे का निशान 220 मीटर पर लगा हुआ है। ऐसे में गंगा खतरे के निशान के बेहद करीब है। गंगा के साथ साथ मालन, रामगंगा, कोटावाली और रवासन समेत अन्य नदियों में उफान बना हुआ है।
चारे का संकट, कटान का खतरा बढ़ा
गंगा में उफान से खादर इलाके के दर्जनों गांव में चारे का संकट गहरा गया है। गंगा के पास बसे गांव की अधिकांश खेती गंगा के पार है। अब जलस्तर बढ़ने से लोग नाव लेकर गंगा के उस पार भी नहीं जा रहे हैं। बता दें कि दर्जनभर गांव के लोग रोजाना गंगा के पार से चारा लेकर आते थे। इसके साथ ही गंगा किनारे वाले खेतों में पानी भरा हुआ है। इससे धान की फसल चौपट होने का भी खतरा मंडरा रहा है।
दिनभर होती रही बारिश, पारा गिरा
बुधवार की सुबह शुरू हुई बूंदाबांदी दोपहर तक होती रही। शाम ढली तो बादल जमकर बरसने लगे। बारिश होने से मौसम में ठंडक घुल गई। इससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को अधिकतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि मंगलवार को 31.8 बना हुआ था। दो डिग्री की गिरावट के साथ बुधवार को न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।