उत्तराखंड से चूजों, मुर्गियों को लाने पर लग सकती है रोक
बिजनौर। कई राज्यों में पक्षियों में बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। सोमवार को मुर्गियों के 150 सैंपल बरेली लैब भेजे जाएंगे। इसके अलावा उत्तराखंड से चूजों व मुर्गियों को लाने पर भी रोक लगाई जा सकती है।
बर्ड फ्लू से जिला अब तक सुरक्षित है। जिले में बर्ड फ्लू का अब तक एक मामला भी नहीं मिला है। कुछ जगह पर कौए मरे हुए मिले हैं लेकिन जांच में उनकी मौत को सामान्य पाया गया है। 38 कबूतरों की भी मौत हुई थी, इसकी वजह ठंड बताई गई। इसके बावजूद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। प्रशासन का मुख्य ध्यान पोल्ट्री फार्म पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि बर्ड फ्लू पक्षियों से इंसानों में फैल सकता है लेकिन तब ही जब वे संक्रमित पक्षी के मांस को कच्चा या कम पकाकर खाएं। पोल्ट्री फार्म संचालकों को पहले ही सचेत किया जा चुका है। अब पशुपालन विभाग पोल्ट्री फार्म पर से मुर्गियों के सैंपल ले रहा है। ये सैंपल सोमवार को बरेली की लैब भेजे जाएंगे। अब तक की जांच में भी किसी भी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू के लक्षण नहीं दिखे हैं। पोल्ट्री फार्म वालों को बाहर से मुर्गी न लाने की सलाह दी गई है। हो सकता है कि प्रशासन उत्तराखंड से आने वाले एक दो दिन में उत्तराखंड से आने वाली मुर्गियों पर रोक लगा दी जाए।
ये हैं बर्ड फ्लू के लक्षण
-मुर्गी की आंख व नाक से अत्यधिक स्राव होना।
-मुर्गी की कलगी व पंजे नीले पड़ जाना।
-मुर्गी की गर्दन व चेहरे पर सूजन होना।
-मुर्गी का एक ही स्थान पर बैठे रहना।
-मुर्गी को बुखार, दस्त आना व मांसपेशी में अकड़न होना।
ये करें बचाव
-फार्म के पास अनावश्यक लोगों को न आने दें।
-फार्म के चारों ओर चूना डालना।
-रोजमर्रा के कर्मचारियों को सैनिटाइज करें।
-फार्म में आते-जाते समय कपड़े बदलें।
-मुर्गियों को अच्छी गुणवत्ता की खुराक दी जाए।
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ठंड से हुई थी कबूतरों की मौत
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गजरौलाशिव/बेगावाला। रविवार को जिले भर में कहीं पर भी कोई कौआ या अन्य पक्षी मरा हुआ नहीं मिला। गांव जंदरपुर व गजरौलाशिव में कबूतरों की मौत सर्दी के प्रकोप से होना पाया गया। कबूतर पालने वालों को बाड़े को गरम रखने के लिए जरूरी हिदायत दी गई है।
शनिवार को गांव खादर के गांव धर्मनगरी, घासीपुरा व नजीबाबाद के गांव बेगावाला में अलग अलग स्थानों पर सात कौए मरे मिले थे। गांव गजरौलाशिव में आदेश के 18 तथा गांव जंदरपुर में रमजानी के 20 कबूतर भी मर गए थे। पशुपालन विभाग की टीम ने गांव धर्मनगरी व घासीपुरा में मिले तीनों कौओं के पोस्टमार्टम किया तो उनकी मौत सामान्य पाई गई। पशुपालन विभाग की टीम रमजानी और आदेश के घर भी गई। पशुधन प्रसार अधिकारी मौसम चौधरी ने जांच में पाया कि कबूतर ठंड से मर रहे हैं। ठंड की वजह से उन्हें वायरल डिजिज हुआ है। दस कबूतर बीमारी से ग्रसित मिले। उन्होंने कबूतर पालकों को बीमार कबूतर अलग करने को कहा। साथ ही ठंडी हवा के झोंकों से बचाने के लिए बाड़े को टाट की बोरी से ढकने, कबूतरों को मल्टी विटामिन देने, बाड़े को गरम रखने को बिजली का बल्ब लगाने और बाड़े के पास सैनिटाइजेशन करने को कहा। उन्होंने बताया कि सर्दी से कबूतरों की मौत की वायरल डिजिज को आम भाषा में गर्दन घूम कहा जाता है।
अभी कहीं नहीं बर्ड फ्लू के लक्षण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.भूपेंद्र सिंह के अनुसार जिले में कहीं भी बर्ड फ्लू के लक्षण नहीं मिले हैं। जो कौए मरे मिले वे बहुत दूर दूर मिले थे। पक्षियों की मौत स्वाभाविक हुई है। पोल्ट्री फार्म संचालकों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग द्वारा सोमवार को सैंपल जांच को भेजे जाएंगे।
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एक कौवा मरा मिला, ठंड से मर रहे कबूतर
स्योहारा। गांव गल्लाखेड़ी के जंगल में एक कौआ मरा हुआ मिला है। वहीं ठंड की वजह से कबूतर भी मर रहे हैं। गांव गल्लाखेड़ी में एक जगह कौवों के पंख पड़े मिले लेकिन कोई शव नहीं था। वहां से करीब 200 मीटर दूर एक कौआ मरा हुआ मिला। क्षेत्र में शीतलहर और ठंड से कबूतर भी मर रहे हैं। गांव हरौली व पट्टी में एक दो कबूतर भी मरे हैं। गांव फैजुल्लापुर निवासी नीरज, मोहल्ला कस्बा के कमालू, मोहल्ला शेखान के अबरार के कई कबूतर बुखार से पीड़ित है। कबूतर पालक बीमार कबूतरों को अलग बाड़े में रख रहे हैं। पशुधन प्रसार अधिकारी सतीश कुमार का कहना है कि कौओं और कबूतरों की मौत ठंड से हुई है। अगर बर्ड फ्लू होता तो बड़ी तादाद में पक्षी मरते। क्षेत्र में बर्ड फ्लू का कोई नामोनिशान नहीं है।