वार्डों का अनुक्रमांक बदलकर आरक्षण में खेल
बिजनौर। जिले में जिला पंचायत सदस्य का एक वार्ड पिछले 25 साल से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं हुआ है। आरोप है कि लगातार तीसरी बार वार्ड को पिछड़े वर्ग को आरक्षित कर दिया गया है। ग्रामीणों ने मामला सीडीओ व डीपीआरओ के सामने रखा। परंतु कुछ हासिल नहीं हुआ। आरक्षण के अंतिम प्रकाशन से पूर्व कोर्ट के स्टे आने के बाद इंसाफ को लेकर इस जगी है।
मामला हल्दौर ब्लॉक का है। ग्राम शादीपुर के इंद्रजीत सिंह, अभिषेक, लाल सिंह एडवोकेट, बलराम आदि के अनुसार वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में हल्दौर ब्लाक में जिला पंचायत के पांच वार्ड थे। ब्लॉक की पांच पंचायत नगरपालिका परिषद बिजनौर में शामिल हो गई हैं। इस कारण परिसीमन के बाद वार्ड एक को समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद ब्लॉक के जिला पंचायत वार्डों का अनुक्रमांक बदल दिया गया है। अर्थात वार्ड दो को वार्ड एक कर दिया, वार्ड तीन को दो कर दिया गया, वार्ड चार को वार्ड तीन तथा वार्ड पांच को वार्ड चार कर दिया गया है। आरोप है कि वार्ड का अनुक्रमांक बदलने के सिवा कुछ नहीं हुआ है। वार्ड की जनसंख्या आदि कुछ नहीं बदला है।
इंद्रजीत सिंह ने बताया कि पहले का वार्ड चार वर्ष 1995 से एससी के लिए आरक्षित नहीं हुआ है। यह वार्ड चार ही परिसीमन के बाद अब वार्ड तीन है जो वर्ष 2021 में फिर बीसी के लिए आरक्षित किया गया है। वार्ड 15 साल से बीसी के लिए ही आरक्षित हैं। बताया कि वार्ड 25 साल से न तो एससी के लिए आरक्षित हुआ है और न ही अनारक्षित रखा गया है।
वार्डों का अनुक्रमांक बदलकर हुआ खेला
इंद्रजीत सिंह ने बताया कि परिसीमन में जिला पंचायत का एक वार्ड समाप्त होने के बाद बाकी वार्ड की जनसंख्या आदि का वार्ड मैपिंग होना चाहिए था परंतु ऐसा नहीं हुआ। आरोप है कि कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए योजना के तहत वार्डों का केवल अनुक्रमांक बदलकर आरक्षण में खेल हुआ है। इस बारे में सीडीओ तथा डीपीआरओ को प्रार्थना पत्र दिया गया परंतु सुनवाई नहीं हुई।
आरक्षण में अपनाए दोहरे मानदंड
शादीपुर के इंद्रजीत सिंह व लालसिंह आदि ने आरक्षण में दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनका तर्क है कि प्रधान पद के आरक्षण में वर्ष 1995 से एससी केटेगरी में आरक्षित नहीं होने वाली पंचायतों को पहले एससी में आरक्षित किया गया है। फिर जिला पंचायत सदस्य के आरक्षण में ऐसा क्यों नहीं हुआ है। कहा कि न्यायालय के स्टे के बाद उन्हें आरक्षण में इंसाफ का भरोसा है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद को साधने की कोशिश
बिजनौर। जिले में जिला पंचायत सदस्य के वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में 57 वार्ड थे। हल्दौर ब्लॉक में परिसीमन के बाद एक वार्ड कम हो गया है। इस प्रकार अब 56 वार्ड है। पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सदस्य वोट करते हैं। इसलिए दावेदार एक एक वोट पर निगाह रखते हैं। आरोप है कि हल्दौर ब्लाक में वार्ड का केवल अनुक्रमांक बदलकर किया गया खेल जिला पंचायत अध्यक्ष पद को साधने की कोशिश है।
डीपीआरओ सतीश कुमार का कहना है कि हल्दौर में एक वार्ड समाप्त हो गया है। इसलिए वहां वार्डो का क्रमांक बदला है। आरक्षण शासन के तय नियमों के अनुसार ही किया गया है।