बिजनौर। भूजल कम होने की वजह से अब कम पानी में तैयार होने वाली फसलों पर शोध चल रहा है। ऐसा ही बिजनौर जिले में नगीना अनुसंधान केंद्र पर भी कम सिंचाई वाली गेहूं की कई नवीन प्रजातियों पर शोध चल रहा है। यह गेहूं की फसलें सिर्फ एक सिंचाई में उत्पादन देंगी। रिसर्च सफल रहा तो ये गेहूं के बीज कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहेंगे।
वैसे तो नगीना अनुसंधान केंद्र पर शोध भारतीय गेहूं एवं जौ शोध संस्थान करनाल के सहयोग से चल रहा है। नगीना अनुसंधान केंद्र पर गेहूं की कई किस्मों पर कार्य चल रहा है। जो एक सिंचाई में उत्पादित होंगी। इस बीज के उत्पादन में कम खर्च रहेगा। साथ ही उत्पादन अच्छा होने से किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ होगा।
नगीना अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह मलिक ने बताया कि इस नवीन बीज पर नगीना अनुसंधान केंद्र के साथ कई और अनुसंधान केंद्रों पर भी शोध चल रहा है।