नालों का बेतरतीब निर्माण बना समस्या, जरा सी बारिश में सड़कें बन जातीं तालाब
बिजनौर। बेतरतीब ढंग से हो रहे शहर के विकास और बढ़ती आबादी के बीच लंबे समय के लिए योजना बनाकर विकास होना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। शहर का ड्रेनेज सिस्टम नाकाफी साबित हो रहा है। हालांकि पचास साल में बड़ नालों की संख्या बढ़कर 38 हो गई है। फिर भी शहर में मोहल्लों को जलभराव झेलना पड़ता है। बरसात होने पर ड्रेनेज सिस्टम की पोल खुल जाती है।
पचास साल पहले शहर में सिर्फ तीन बड़े नाले हुआ करते थे। हालांकि उस वक्त आबादी भी कम थी। इन नालों से होकर पानी शहर के बाहर और तालाबों में चला जाता था। बीस साल पहले तक इनकी संख्या बढ़कर सात पहुंची और अब 38 हो गई है। इसके अलावा शहर में 21 छोटे नाले हैं। जहां जरुरत पड़ती है तो नालों का निर्माण करा दिया जाता है लेकिन ठोस योजना नहीं बनती। नाला बनाकर पानी कहां ले जाया जाएगा, यह तय नहीं हो पाता। क्योंकि साल दर साल आबादी बढ़ रही है। तालाब और तलैया बचे नहीं है।
हालांकि शहर के 11 नालों को सीवर लाइन से जोड़ दिया गया है। फिर भी समस्या का पूरी तरह से समाधान नहीं हुआ। बरसात के अलावा घरों से निकलने वाला पानी को बहा ले जाने में ये लाने सक्षम है लेकिन बरसात में स्थिति बदल जाती है। बरसात का पानी सड़कों पर भरता है। शहर की नई बस्ती, आवास विकास कॉलोनी, ईदगाह रोड, चक्कर रोड और मिर्दगान के पीछे खस्सो वाली कॉलोनी में जलभराव होना आम बात हो चुकी है। एक बारिश में ही पानी सड़कों पर भर जाता है।
नालों की चौड़ाई बढ़ाना नामुकिन
शहर की प्रमुख सड़क सिविल लाइन और सदर बाजार में नालों की चौड़ाई बढ़ाना नामुमकिन है, क्योंकि अतिक्रमण भी एक समस्या है। दुकानों को पीछे हटाया नहीं जा सकता और नालों को चौड़ा किया गया तो सड़क तंग हो जाएगी। ऐसे में जो व्यवस्था पहले से बनी हुई है, उसी से काम चलाना पड़ रहा है। छोटे नालों से ही बड़ी आबादी के पानी की निकासी हो रही है। यही वजह है कि बरसात में उफन जाते हैं।
खाली प्लॉट बन रहे तालाब
मिर्दगान के पीछे खस्सोवाली कॉलोनी में नाले तो बने हुए हैं लेकिन निकासी नहीं होती। पानी नालों से होकर खाली प्लॉट में भर जाता है। यहीं के रहने वाले फहीम और काले आदि ने बताया कि रविवार को जब प्लॉट में भी पानी ज्यादा हुआ तो पालिका ने टैंकर लगाकर पानी निकाला था। उधर, चक्कर रोड का भी यही हाल है। चक्कर रोड पर पड़ने वाली कॉलोनियों का पानी चक्कर रोड के दोनों ओर बने छोटे नाले में आकर गिरता है। इन नालों का कहीं ऐसा छोर नहीं है कि पानी तालाब वगैरहा में चला जाए। ऐसे में पानी नालों से उफन कर खाली प्लॉट में भरना आम बात है।
वर्जन...
शहर में पचास साल पहले तक सिर्फ तीन नाले थे। अब 38 बड़े और 21 छोटे नाले हैं। हाल ही में चार नालों को बड़ा किया गया है। कुछ जगहों पर अतिक्रमण की वजह से चौड़ाई बढ़ना संभव नहीं है। नालों की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी तो सड़क तंग होगी। आवास विकास में भी मकानों के सामने रैम्प बने होने से पानी निकासी में बाधा आती है। हालांकि शहर के आउटर में बड़े नालों का निर्माण कराया गया है।
.. शमशाद अंसारी, चेयरपर्सन पति
बिजनौर में बीएसए कार्यालय के बाहर खस्ताहल नाला।- फोटो : BIJNOR