रामायण से मिलती है कर्तव्य और प्रेम की सीख : उद्धव दास जी महाराज
नजीबाबाद। कथा वाचक उद्धवदास जी महाराज ने कहा है कि श्री राम कथा से व्यक्ति को कर्तव्य, धर्म और प्रेम की सीख मिलती है। पिता की आज्ञा को कर्तव्य समझते हुए श्रीराम ने वनवास गृहण किया। माता सीता ने पत्नी धर्म निभाया, लक्ष्मण ने भाई धर्म निभाते हुए उनका साथ दिया। जबकि भाई के अगाध प्रेम को दर्शाया भरत ने।
श्री बाला जी धाम मंदिर में श्रीराम कथा को सुनने के लिए श्रद्धालु उमड़ रहे। श्रीराम वनवास और भरत मिलाप की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
श्री बाला जी धाम मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में कथा वाचक उद्धवदास जी महाराज ने श्रीराम के वनवास एवं भरत मिलाप के प्रसंग को मधुर भजनों के माध्यम से प्रस्तुत किया। राम-केवट संवाद एवं भरत मिलाप की प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। सीता, लक्ष्मण और मंत्री सुमंत के साथ भगवान श्रीराम ने वनों की ओर प्रस्थान किया। राम के वियोग में दशरथ ने प्राण त्याग दिए। गंगा पार करने के लिए श्री राम ने मल्लाह केवट से आग्रह किया। भरत अयोध्यावासियों के साथ श्री राम से मिलने वनों की और रवाना हो गए। श्रीराम-भरत मिलाप से अयोध्यावासी बिलख पड़े।
इस अवसर पर कामेश्वर प्रसाद गौड़, सुमित्रा, नीतू, कमला, लवकुश, पप्पी, शशांक शर्मा, सुधीर शर्मा, संजय शर्मा श्रद्धालु उपस्थित रहे।