बिजनौर में बूंदाबांदी और बादल मौसम में ठंडक बढ़ा रहे हैं। बादलों को देखकर एक-दो दिन में तेज बारिश होने का अनुमान लगाया जा रहा है। ठंड में भी रात में गरीबों व राहगीरों को शरण देने के लिए करोड़ों की लागत से बनाया गया शेल्टर होम खाली पड़ा है और रेलवे स्टेशन के पास बच्चे अपने परिवारों के साथ खुले आसमान के नीचे सो रहे हैं। पिछले दो दिन से लगातार पूर्वा हवा चल रही है। शनिवार की रात में हल्की बूंदाबांदी हुई। इसके बाद मौसम का मिजाज बदल गया है। रविवार को सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे। मौसम विभाग की माने तो सोमवार को बारिश होने का अनुमान लगाया जा रहा है। आसमान में बादल होने के कारण कोहरा नहीं छाया, लेकिन मौसम के करवट बदलने से अभी और अधिक ठंड होने की बात कही जा रही है।
किसानों का कहना है कि यदि आसमान में छाए बादल पाले में बदल गए तो आलू की फसल को नुकसान हो सकता है। दोपहर करीब दो बजे सूर्य देव के कुछ समय के लिए दर्शन होने से लोगों ने राहत की सांस ली। शाम में फिर बादल छाए रहने के बाद मौसम में ठंडक बढ़ गई है। नगर के कई मुख्य चौराहों पर रात्रि में अलाव की व्यवस्था की गई है, जिससे रात्रि में आने जाने वालों को राहत मिल सके।
ठंड से राहत दिलाने के लिए डूडा द्वारा करोड़ों की लागत से इंदिरा बाल भवन में शेल्टर होम का निर्माण कराया गया है, लेकिन शेल्टर होम खाली पड़ा है। वहां पर ठहरने के लिए एक दुक्का लोग ही आ रहे हैं, जबकि रेलवे स्टेशन पर कई परिवार खुले आसमान के नीचे सो रहे हैं। इन परिवारों को ठंड से बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है। इन परिवारों के छोटे बच्चे भी शामिल हैं। डीएम के आदेश पर बीएसए महेशचंद ने जिले के कक्षा पांच तक के सभी विद्यालयाें में बच्चों की छुट्टी आठ जनवरी तक कर दी गई है।
गरीब परिवारों को ले जाएंगे शेल्टर होम : शमशाद
नगर पालिकाध्यक्ष पति शमशाद अंसारी के अनुसार शेल्टर होम के बारे में होर्डिंग्स लगाकर व मुनादी कराकर बताया जा रहा है। वे भी कई बार जाकर शेल्टर होम की व्यवस्थाओं को देख चुके हैं। गंदगी साफ कराएंगे। कहा कि रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले परिवारों के पास वे खुद जाकर उन्हें शेल्टर होम में लेकर जाएंगे। वहीं, एसडीएम ब्रिजेश कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने जिला अस्पताल सहित अन्य जगहों पर बोर्ड लगवाकर शेल्टर हाउस में जाने की अपील की है।
चार साल पहले हुई थी एक मौत
ठंड में ठिठुरते हुए रेलवे स्टेशन के पास खुले आसमान के नीचे एक परिवार के एक सदस्य की 2015 में ठंड से मौत हो गई थी, जबकि नगर पालिका द्वारा बनाया गया रैन बसेरा पास में ही रेलवे स्टेशन पर था।
हल्के कंबल में कटेगी रात
शेल्टर होम में रुकने वालों को दो कंबल दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन ये कंबल इतने हलके हैं कि रात को इनमें ठंड से राहत नहीं मिलेगी। इसके अलावा सात बजे तक शेल्टर होम के पलंग के गद्दों पर चादर आदि भी नहीं बिछाई गई थी।
शेल्टर होम में गंदगी का बुरा हाल
शेल्टर होम में गंदगी का भी बुरा हाल है। यूरिनल के पाइप टूटे हुए हैं। यहां पर शौचालय के पास भी फर्श और दीवारें बहुत गंदी हैं। शेल्टर होम में बीयर की बोतल भी रखी मिली। सफाई के बारे में पूछने पर वहां मौजूद कर्मचारी कुछ नहीं बोल पाए।