बारिश ने लगाया शरद कालीन गन्ने की बुवाई पर ब्रेक
धामपुर। दो दिन से हो रही बारिश ने गन्ने की शरद कालीन सहफसली बुवाई पर ब्रेक लगा दिया है। खेतों में पानी जमा होने से बुवाई का काम थम गया है। अब गन्ने की बुवाई के लिए फिर से खेतों को तैयार करना पड़ेगा। उधर, धान की फसल के खेतों में भीगने से भारी नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।
गन्ना विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक अक्तूबर से शरद कालीन गन्ने की बुवाई का कार्य शुरू हो जाता है। ढाई हजार हेक्टेयर में से अभी तक सिर्फ 100 हेक्टेयर की ही बुवाई हो पाई है। अन्य किसानों ने बुवाई के लिए खेत तैयार कर लिए थे। लेकिन दो दिन हुई झमाझम बारिश ने तैयारी को चौपट कर दिया है। किसानों को अब पानी सूखने का इंतजार करना होगा। पानी सूखने के बाद खेतों को फिर से तैयार करना पड़ेगा। जिस कारण गन्ने की शरद कालीन बुवाई के लिए किसान लेट हो जाएंगे। इसका असर गन्ने के उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
एससीडीआई ने बताया कि पिछले दो दिन से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से गन्ने की शरद कालीन बुवाई पर करीब दो सप्ताह तक का ब्रेक लग गया है। अक्तूूबर के अंत तक गन्ना विभाग की ओर से लक्ष्य के अनुरूप शरद कालीन गन्ने की बुवाई कराए जाने का प्लान तैयार किया गया था। ऐसे में अब किसानों को एक बार फिर से गन्ने की बुआई करने को खेतों को तैयार करने को मेहनत करनी होगी। गन्ने की नई प्रजातियों के बीज से बुआई करने पर करीब 120 कुंटल प्रति बीघा उपज होने की संभावना है।
- ट्रेंच विधि पर दिया जा रहा जोर
गन्ना विभाग के अधिकारी किसानों को गन्ने की अधिक उपज लेने के लिए ट्रेंच विधि से गन्ने की सहफसली खेती करने पर जोर दे रहे है। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अमित कुमार पांडेय का कहना है कि विभाग की ओर से इस बार ढाई हजार हेक्टेयर में शरद कालीन गन्ने की बुवाई कराने का लक्ष्य है। अभी तक करीब 100 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में गन्ने की बुवाई सहफसली के रूप में की जा चुकी है।
बकौल एससीडीआई, इस बार गन्ना विभाग किसानों को धामपुर चीनी मिल द्वारा विकसित की गईं तीन नई उन्नतशील प्रजातियों के बीज से सहफसली गन्ने की खेती करने पर जोर दे रहा है। इन प्रजातियों में कोसा 13235, सीओ वाईएलके 14201 और सीओ 15023 शामिल हैं। क्षेत्र का किसान अगेती प्रजाति के रूप अब तक सीओ 0238 गन्ने की प्रजाति के बीज से गन्ने की खेती करता आ रहा था। लेकिन इस प्रजाति में रोग आ गया है। किसानों को प्रेरित किया जा रहा है कि वह ट्रेंच विधि से शरद कालीन गन्ने की बुवाई नई प्रजातियों के बीज से एकल आंख विधि करें। ऐसा करने से किसानों को कम लागत पर सामान्य से करीब 25 प्रतिशत से अधिक मुनाफा होगा है। सर्दियों में फसलों में रोग नहीं लगता। इसलिए किसानों को अधिक से अधिक शरद कालीन सह फसली गन्ने की खेती करनी चाहिए ।