बरसात ने ईंट भट्ठा मालिकों की बढ़ा दी टेंशन
बिजनौर। बेमौसम की बारिश से सबसे ज्यादा असर ईंट भट्टों पर पड़ा है। ईंट के दाम में एक हजार रुपया प्रति हजार की वृद्धि हो चुकी है। यही हाल रहा तो, ईंट के दाम में और उछाल आ सकता है। इससे आशियाना बनाना मंहगा हो जाएगा।
जनपद में 300 के आसपास ईंट भट्ठे हैं, जो दशहरा के आसपास शुरू होते हैं। भट्ठे समय पर शुरू होने पर ईंट बनने लगी किंतु उन्हें पकाने का मौका नहीं मिला। एक ईंट को सांचें में ढ़ालने के बाद सुखाने के लिए लगभग 15 से 20 दिन का समय चाहिए। सर्दी में कुछ ज्यादा समय लगता है। लेबर ईंट पकाने के लिए तैयारी करती है। इस बार जब तक ईंट के पकने का समय आता तो बारिश हो जाती। बारिश में ईंट गल जातीं। दशहरा से अब तक नौ - दस बार बारिश हो चुकी है। जब भी माल तैयार होता है, बारिश की भेंट चढ़ जाता है। भट्टा स्वामी मानते हैं कि इससे हर साल के मुकाबले जनपद में आधी भी ईंट तैयार नहीं होंगी। ईंट न मिलने से इनका मूल्य बढ़ेगा। बिजनौर में प्रति हजार ईंट का मूल्य 4500 रुपये तक रहता है। इस बार एक हजार रुपये ज्यादा है। बाहर के जनपद से आने वाली ईंट का मूल्य दो हजार रुपया प्रति हजार ज्यादा है।
- ईंट भट्ठा व्यवसायी आशीष जैन बताते हैं कि इस बार बहुत नुकसान हुआ है। बार-बार होने वाली बारिश ने हालत खराब कर दी है। प्रत्येक भट्ठा मालिक को औसतन आठ से दस लाख रुपये का नुकसान है।
- ईंट भट्ठा एसोसिएशन के सचिव मुहम्मद जावेद कहते हैं कि बारिश से ईंट भट्टों को बहुत ज्यादा नुकसान है। अधिकांश भट्ठों पर ईंट पकनी ही शुरू नहीं हुई। चांदपुर में शुरू हुईं थी, वहां भी किसी का आधा चक्कर पका और किसी भट्टे का एक चक्कर।
- ईट भट्ठा एसोसिएशन के अध्यक्ष रावेंद्र कुमार कहते हैं कि दस से 12 लाख के आसपास नुकसान हुआ है। जिन्होंने ईट पकाई अभी शुरू नहीं की थी, उन्हें भी ऐसा ही नुकसान होगा। उनकी राय में मूल्य ज्यादा नहीं बढ़ेगा, क्योंकि सड़कों, नालों में अब सीमेंट की ईंट लगने लगी। रियल स्टेट में भी भारी मंदी हैं। रियल स्टेट में ज्यादा मांग रहती थी। अब यह कार्य पूरी तरह बंद हैं।