बिजनौर। जिले के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए मेडिकल अस्पताल में सुविधाएं बढ़ रही है। इसी बीच अभी हाल ही में नई जांच पीटी-आईएनआर (प्रोथ्रोम्बिन टाइम- इंटरनेशनल नॉर्मलाइज्ड रेशियो) शुरू हुई है। इससे रक्त के जमने वाले थक्के की स्थिति का आकलन हो सकेगा।
जिला अस्पताल को महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध किया गया है। अस्पताल में अब पीटी-आईएनआर जांच शुरू होने से लोगों को काफी फायदा मिल रहा है। सर्जरी से पहले और सांप काटने पर रक्त का थक्का कितनी देर में जम रहा है। इसकी जानकारी पीटी-आईएनआर जांच से होती है। मेडिकल अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में रोजाना 15 मरीज पीटी-आईएनआर जांच के लिए पहुंच रहे हैं।
पिछले 30 दिनों में ही 15 रसल वाइपर शहर के अंदर से ही पकड़े जा चुके हैं। रसेल वाइपर में हेमोटॉक्सिक विष होता है। जो, लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है।
इसलिए, पीटी-आईएनआर जांच में पता चल जाता है कि रक्त का थक्का जमने में कितनी देर लग रही है। रिपोर्ट आने के बाद जरूरत के हिसाब से मरीज का इलाज शुरू कर दिया जाता है।
मेडिकल अस्पताल में करीब 400 लोगों को लगी एंटी स्नेक वेनम : मेडिकल अस्पताल में सर्पदंश के करीब 400 लोगों को इस वर्ष एंटी स्नेक वेनम लगाई गई। एंटी स्नेक वेनम लगने के बाद मरीजों की जान बच गई। अब यह जांच मरीजों के लिए वरदान साबित होगी। जरूरत होने पर ही मरीजों को वेनम लगेगी।
निजी लैब में होती है महंगी जांच : पीटी-आईएनआर जांच की कीमत निजी लैब में 400 रुपये तक है। वहीं, मेडिकल अस्पताल में यह जांच निशुल्क की जा रही है। चिकित्सक सर्जरी से भी इस जांच को कराते हैं। ताकि, पता चल सके कि सर्जरी करने के समय खून कितने समय में बहना बंद हो जाएगा।