बिजनौर के ग्राम गाजीपुर सीकरी में की जा रही सहफसली खेती।
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बिजनौर में किसानों की आमदनी दोगुनी करने में सहफसली खेती कारगर साबित हो रही है। गन्ने के खेतों में दूसरी फसलें लहरा रही हैं। इन फसलों को बेचकर किसान अतिरिक्त आमदनी पा रहे हैं।
बिजनौर जिला शुगर बाउल बन चुका है। भले से ही गन्ने के दाम न बढ़े या समय से भुगतान न मिले, लेकिन किसानों का मोह गन्ने से भंग नहीं हुआ। हालांकि इससे किसानों की आमदनी में खास बदलाव नहीं हुआ, लेकिन अब जिले के किसान सहफसली खेती की ओर जागरूक हुए हैं। ट्रैंच विधि से गन्ना बोकर किसान आमदनी बढ़ा रहे हैं। ट्रैंच विधि में गन्ने की गुलों में काफी अंतर होता है। इसमें अन्य फसलें लगाकर आमदनी बढ़ाई जाती है। गांव सीकरी गाजीपुर के किसान ओमपाल सिंह ने सितंबर में ट्रैंच विधि से दस बीघा शीतकालीन गन्ना बोया था। सर्दी में उन्होंने अपने खेत में आलू, सरसों आदि फसलें बोईं। मार्च तक इन फसलों से खेत खाली हो गए। इन फसलों से ओमपाल सिंह को करीब 60 हजार रुपये की आमदनी हुई है। ओमपाल सिंह अकेले किसान नहीं हैं, जिन्होंने ट्रैंच विधि से गन्ना बोया है। अब जिले के काफी किसान ट्रैंच विधि से गन्ना बोकर सहफसली खेती कर आमदनी बढ़ा रहे हैं।
डीसीओ ओपी सिंह के मुताबिक जिले के किसान सहफसली खेती को अपना रहे हैं। इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है। जिले में गन्ने का रकबा करीब सवा दो लाख हेक्टेयर है। इसमें से करीब 50 हजार हेक्टेयर गन्ना ट्रैंच विधि से बोया गया है। जिले में हजारों हेक्टेयर जमीन में गन्ने के साथ सहफसली खेती की जा रही है।