गंज में विदुर कुटी के पास गंगा में डाला जा रहा गंदा पानी।
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बिजनौर में गंगा किनारे बसे गांवों का गंदा पानी नदी में जाने से रोकने के लिए गांवों में सोलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्लान बनाया गया है। गांवों का गंदा पानी गंगा की निर्मल धारा में डलने से रोका जाएगा। इसके लिए प्रशासन ने करीब 11 करोड़ रुपये के बजट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी है।
गंगा के पानी को निर्मल रखने के लिए व गंगा किनारे हरियाली बढ़ाने के लिए अनेक अभियान चलाए जा रहे हैं। जिले में गंगा किनारे 21 गांव दारानगर, जहानाबाद, निजामतपुरा, सलेमपुर मथना, रसूलपुर पितनका, बादशाहपुर, दयालवाला, जहानाबाद, खलीलुल्लापुर, खेड़की हेमराज, कुंदनपुर, मोहीउद्दीनपुर, रफीउल्लानगर उर्फ रावली, सैफपुर खादर, तैय्यबपुर काजी, टीप, कुंवर चतर भोजपुर, बसंतपुर, दत्तियाना, सुजातपुर खादर, तैय्यबपुर गोरवा बसे हैं। यहां पर विशेष तौर पर औषधीय गुणों वाले पौधे लगाने की योजना है। सीडीओ डा.इंद्रमणि त्रिपाठी ने इन गांवों से नालियों से निकलने वाली गंदे पानी के संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड विभाग से जांच करने को कहा था। विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने जांच की तो पता चला कि गांव दारानगर, जहानाबाद, निजामतपुरा, खेड़की हेमराज, रफीउल्लानगर उर्फ रावली का पानी गंगा नदी में गिरता है। इसके अलावा कई गांवों का गंदा पानी गंगा नदी में जाने की संभावना है। इन गांवों के गंदे पानी व कूड़े के निस्तारण के लिए सोलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्लान बनाया गया है।