बिजनौर के शेरकोट में किसान गोष्ठी में मुख्य अतिथि डीसीओ ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि खेती पर वातावरण का असर पड़ता है। इसलिए ट्रैंच और मानसून विधि से ही गन्ने की बुआई करें। ऐसा करने से अधिक उत्पादन किया जा सकता है ।
डीसीओ ने किसानों को बताया कि इस विधि के माध्यम से 750 क्विंटल प्रति एकड़ तक गन्ना उत्पादन किया जा सकता है। ट्रेंच विधि से गन्ना बुआई में 70% तक पानी की बचत होती है। गन्ना बुआई में सहफसली जैसे दलहन, सब्जियां तथा तिलहन आदि से अत्यधिक आमदनी से किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
धामपुर चीनी मिल के महाप्रबंधक (गन्ना) आजाद सिंह ने किसानों को गन्ने की बीमारियों से बचाव के कई तरीके बताए। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को जीएसडी जैसी बीमारी से गन्ने को बचाना चाहिए। गन्ने को उचित दूरी पर बोना चाहिए। एससीडीआई देवेंद्र कुमार तिवारी, अवदेश डागर, वैज्ञानिक पादप रोग गन्ना संस्थान मुजफ्फरनगर, डा. एपी सिंह ने किसानों को सुझाव दिए। इस अवसर उपगन्ना प्रबंधक मनोज कुमार, प्रेमराज सिंह, सुरेश सिंह, कृष्ण गोपाल, सूरज सिंह, इसरारउल हक़ ,लक्ष्मण सिंह, उदवीर मौजूद रहे।
गन्ने की ग्रोथ देखकर दंग रह गए वैज्ञानिक
बिजनौर। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों ने जिले में वन बड और ट्रेंच विधि से बोए गए गन्ने का निरीक्षण किया। बिना रोग वाला गन्ना देखकर कृषि वैज्ञानिक दंग रह गए। कृषि वैज्ञानिकों डा.अवधेश डांगर, डा.एपी सिंह और डा.प्रवीण कुमार ने गांव तिसोतरा और करौंदा चौधर में सिंगल बड एवं ट्रेंच विधि से बोए गन्ने के खेतों को देखा। वैज्ञानिक गन्ने की ग्रोथ देखकर दंग रह गए।
किसानों ने वैज्ञानिकों को बताया कि सिंगल बड विधि से तैयार किए गए गन्ने की पौध में कोई रोग नहीं लगा है। इस पौध को ट्रेंच विधि से बोने पर पैदावार भी दोगुनी हो रही है। इसकी पैड़ी में भी रोग नहीं आता है और पैदावार अच्छी होती है।
गन्ने की गुलों के बीच में सब्जी आदि की खेती भी वे कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने प्रदेश के बाकी हिस्सों में भी इसी तरह गन्ना उत्पादन करने को जागरूक किया। इस दौरान डीसीओ ओपी सिंह, ज्येष्ठ अफसार अहमद, रामभद्र द्विवेदी सहित अन्य मौजूद रहे।