गांव में ही स्कूल बनवाने पर अडे़ ग्रामीण
हल्दौर। गांव जैनुलआबदीनपुर में प्राथमिक विद्यालय का निर्माण कराने की मांग पूरी नहीं होने से क्षुब्ध ग्रामीणों ने दूसरे गांव के स्कूल में बच्चों को पढ़ने नहीं भेजा। इसे लेकर शिक्षा विभाग में भी हड़कंप मचा है। वहीं, गांव के 151 बच्चों का भविष्य अधर में लटका है। सिफ्ट किए गए स्कूल में बुधवार को बच्चों की संख्या शून्य होने पर शिक्षा विभाग के अधिकारी भी परेशान दिखाई दिए। ग्रामीणों ने स्कूल का भवन जैनुलआबदीनपुर में ही बनवाने की मांग की है।
ब्लॉक क्षेत्र के गांव जैनुलअबदीनपुर के प्राथमिक विद्यालय के भवन को करीब तीन वर्ष पूर्व जर्जर घोषित कर दिया गया था। स्कूल को पड़ोसी गांव धनौरी के जूनियर हाईस्कूल में वैकल्पिक व्यवस्था के अंतर्गत शिफ्ट कर दिया गया। बच्चों को अपने गांव से करीब दो किलोमीटर की दूरी पैदल चलकर जाना पड़ता है। नसीम अहमद, नौशाद अहमद, बलवंत सिंह, मोहम्मद साकिर, नरेंद्र सिंह, साजिद, सईद, गुलजार आदि अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने गांव में जर्जर पड़े विद्यालय के स्थान पर नया भवन निर्माण के लिए विभागीय अधिकारियों से कई बार मांग की। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं। वहीं, अभिभावक आदमखोर गुलदार के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। बुधवार को अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। मंगलवार को ग्रामीणों ने धनौरी के स्कूल में बच्चों को स्कूल नहीं भेजने की चेतावनी दी थी। प्राथमिक विद्यालय के मुख्याध्यापक प्रभात कुमार का कहना है कि विद्यालय में पंजीकृत कुल 151 बच्चों में से एक भी बच्चा उपस्थित नहीं हुआ। विद्यालय में शिक्षण कार्य ठप होने के साथ मिड-डे-मील भी नहीं बनवाया गया। बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि जब तक विभागीय अधिकारी उनके गांव में विद्यालय निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं करते तब तक वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
ग्रामीणों ने दी धरना प्रदर्शन की चेतावनी
ग्रामीणों ने करीब तीन वर्षों से जर्जर पड़े स्कूल का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू न होने की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पोर्टल पर करने का निर्णय लिया और धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस ओर सुध नहीं ली। अब ग्रामीणों के बच्चों को स्कूल नहीं भेजने से शिक्षा विभाग के अफसरों में हड़कंप मचा है। जूनियर हाईस्कूल धनौरी में पंजीकृत 71 बच्चों को पढ़ाने के लिए दो कमरे बचे हैं। दोनों कमरों में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। मुख्य अध्यापिका साजिया का कहना है कि बच्चों को स्कूल के बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जाता है। जगह के अभाव में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होने लगी है। धनौरी के स्कूल में भी बच्चों के बैठने की व्यवस्था के लिए उचित कक्ष नहीं है। धनौरी के प्रधानाध्यापक अमित त्यागी का कहना है कि स्कूल में बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त स्थान न होने के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया।
बीईओ ने गांव में पहुंच कर ली खबर
ब्लॉक हल्दौर के खंड शिक्षा अधिकारी पीके कौशिक ने बुधवार को गांव जैनलआबदीनपुर पहुंच कर ग्राम प्रधान व अन्य ग्रामीणों से स्कूल भवन के बारे में बात की। बीईओ ने ग्रामीणों को बताया कि जर्जर स्कूल भवन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से धनराशि आने के बाद ही स्कूल भवन बनेगा। स्कूल का प्रस्ताव कब भेजा गया है, इस बारे में उन्होंने ग्रामीणों को कोई ठोस जवाब नहीं दिया। बैठक में प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक प्रभात कुमार भी मौजूद रहे। प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्कूल में बच्चों के नहीं आने की सूचना बीईओ को भेजी गई थी।