बचाव ही है बेहतर उपचार
बिजनौर। पिछले दस माह में जिले में 37 एड्स के नए रोगी मिले हैं। इनमें 20 पुरुष और 17 महिलाएं शामिल हैं। पांच महिलाओं की डिलीवरी हो चुकी है, जबकि 860 मरीजों का पहले से ही इलाज किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार बचाव ही इसका सबसे बेहतर उपचार है। इसका कोई स्थायी उपचार नहीं है। हालांकि दवाओं के जरिये रोगी के जीवन काल को बढ़ाया जरूर जा सकता है।
एड्स एक भयंकर बीमारी है। इसका नाम सुनते ही रूह कांप उठती है। एक दिसंबर को सारी दुनिया में विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन पूरी दुनिया को एड्स के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का मौका देता है। एड्स पहली ऐसी बीमारी थी जिसके विरोध में 1988 में पूरी दुनिया ने एक साथ मिलकर चलने की ठानी और इसके लिए एक दिसंबर को चुना। चिकित्सकों के अनुसार एड्स नामक बीमारी को शुरुआत में इसे लोगों में पाई जाने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी समझा गया। 1982 में इस बीमारी को एड्स का नाम मिला था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में 2.1 प्रतिशत लोग एचआईवी से ग्रसित हैं। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी बीएस रावत के अनुसार अप्रैल से नवंबर 2019 तक कुल 37 केस पॉजिटिव मिले हैं। इनमें 20 पुरुष और 17 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं और 860 मरीजों का पहले से ही उपचार चल रहा है।
इन अस्पतालों में उपलब्ध है निशुल्क जांच
नोडल अधिकारी के अनुसार जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, नजीबाबाद के महिला अस्पताल, 11 ब्लॉक के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एचआईवी की जांच फ्री की जाती है। सभी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में किट उपलब्ध हैं।
लक्षण
. बार-बार बुखार आना।
. अधिक थकान होना।
. मांसपेशियों में खिंचाव होना।
. जोड़ों में दर्द व सूजन।
. सिर में लगातार दर्द बने रहना।
बचाव के उपाय
. असुरक्षित यौन संबंध बनाने से बचें।
. खून चढ़ाने से पहले जांच अवश्य कराएं।
. सामान्य व्यक्ति भी जांच कराएं।
. समय से उपचार कराएं।
. मरीज के साथ भेदभाव न हो।
अनुज कुमार शर्मा