माध्यमिक विद्यालयों को खोलने की तैयारी
बिजनौर। जिले के माध्यमिक विद्यालयों को खोलने की तैयारी की जा रही है। शासन ने इसके लिए विद्यालयों से 27 जुलाई तक छात्रों के अभिभावकों के सहमति पत्र मांगे थे। डीआईओएस दफ्तर के अनुसार करीब 46 हजार अभिभावकों ने सहमति पत्र दिए हैं। जिले में 387 माध्यमिक विद्यालय है, जिनमें कक्षा छह से बारह तक के करीब सवा लाख छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं।
जिले के विद्यालय कोरोना के कारण करीब पांच माह से बंद हैं। छात्रों को बिना परीक्षा के अगली कक्षाओं में प्रमोट कर दिया गया है। एक अप्रैल से वर्ष 2021-22 का शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है। छात्रों की 20 मई से आनलाइन पढ़ाई चल रही है। शासन के निर्देश पर एक जुलाई से विद्यालय खुले। शिक्षक विद्यालय आ रहे हैं, परंतु छात्रों को विद्यालय नहीं बुलाया गया था। शासन ने जून में विद्यालयों से छात्रों को स्कूल भेजने के बारे में अभिभावकों के सहमति पत्र लेकर भेजने को कहा था। डीआईओएस दफ्तर के अनुसार उस समय 15-20 हजार सहमति पत्र मिले थे। अब कोरोना कम हुआ है। इसलिए शासन की विद्यालयों को खोलने की तैयारी है। शासन से 26 जुलाई को डीआईओएस दफ्तर को पत्र मिला, जिसमें 27 जुलाई दोपहर दो बजे तक विद्यालयों से सहमति पत्र मांगे गए थे। बताया गया कि शासन को करीब 46 हजार सहमति पत्र भेजे गए हैं।
विद्यालयों में एक जुलाई से दाखिले हो रहे हैं। परंतु छात्र कम संख्या में दाखिला लेने आ रहे हैं। दसवीं व बारहवीं कक्षा का रिजल्ट भी इसी माह आने की संभावना है। इसके बाद कक्षा 11 में दाखिले शुरू होंगे। साथ ही अगस्त माह में कक्षा नौ व ग्यारह के रजिस्ट्रेशन होते हैं। दसवीं व बारहवीं के बोर्ड के परीक्षा आवेदन पत्र भरने शुरू होंगे। डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि विद्यालयों से तैयारी रखने को कह दिया गया है। साफ सफाई, कोरोना से बचाव के लिए सैनिटाइजर का छिड़काव, कक्षा में छात्रों को बैठाने में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने समेत कोरोना गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग की तैयारी पूरी है।
अभिभावकों में बना है कोरोना का खौफ
कोरोना के कारण करीब पांच माह से बच्चे घरों में कैद हैं। ऑनलाइन पढ़ाई तो हो रही है परंतु बच्चों को स्कूल जैसा शैक्षिक माहौल नहीं मिल रहा है। राजेश कुमार, नरपाल सिंह आदि अभिभावकों का कहना है कि यह सही है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किताबी ज्ञान के साथ खेल कूद व सांस्कृतिक गतिविधियां भी जरूरी हैं। परंतु यह भी देखना चाहिए कि कोरोना कम तो हुआ है परंतु पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसलिए बच्चों का टीकाकरण होना जरूरी है। उसके बाद ही स्कूल-कॉलेजों को खोलने पर विचार किया जाना चाहिए।