फजलगढ़ के गांव मोहम्मदपुर राजौरी में बाघ सम्भावित स्थान पर ट्रैप कैमरा लगाते वनकर्मी। स्रोत वन
अफजलगढ़ (बिजनौर)। गांव मोहम्मदपुर राजौरी में चौथे दिन बृहस्पतिवार को भी बाघ की तलाश में वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कांबिंग करते रहे। जिस स्थान पर बाघ दिखाई दिया था, वहां गड्ढों को बंद कराया गया तथा ट्रैप कैमरे लगाए गए। वहां आसपास स्थान चिह्नित कर मचान बनाया जाएगा।
जिस स्थान पर बाघ नजर आया था वहां काफी गड्ढे हैं। शुक्रवार को मचान बनाया जाएगा, ताकि मचान से बाघ पर नजर रखते हुए उसे विशेषज्ञ द्वारा ट्रैंकुलाइज किया जा सके। नगीना रेंजर प्रदीप शर्मा ने बताया संभावित स्थान पर ट्रैप कैमरे लगवाए गए हैं तथा ड्रोन कैमरे से सर्च कराया गया है। उन्होंने बताया की गड्ढों को समतल कराया जा रहा है ताकि ट्रैंकुलाइज होने के बाद बाघ गड्ढों में न जा पाए।
गुलदार के लिए लगाए पिंजरे में कैद हुई फिशिंग कैट : नहटौर के गांव दामनगर के जंगल में स्थित बाबा भूरे शाह नौ गजे पीर की मजार के पास वन विभाग की ओर से गुलदार को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे में डेढ़ माह बाद बृहस्पतिवार को फिशिंग कैट (जंगली बिल्ली) कैद हो गई। उधर पिंजरे में गुलदार के शावक के कैद होने की बात फैलने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण इसे देखने के लिए मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने सूचना वन विभाग को दी। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने इसे पहचान कर ग्रामीणों को फिशिंग कैट होने की जानकारी दी। रेंजर शशांक गुप्ता ने बताया कि जिसे ग्रामीण गुलदार का शावक समझ रहे थे, वह फिशिंग कैट थी।