बिजनौर। माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में मनमानी नहीं चलेगी। शासन के विद्यार्थियों को सभी विषयों की पढ़ाई सुनिश्चित करने के प्रयास हैं। विद्यालयों में खाली पदों की विषयवार जांच होगी। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटी गठित हुई। समिति को 26 मई तक जांच रिपोर्ट शासन को भेजनी है।
शासन माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कथित फर्जी नियुक्ति की शिकायत मिलने के बाद सख्त हो गया है। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति को पारदर्शी बनाने की तैयारी है। जिले में 73 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय है। डीआईओएस कार्यालय में 39 विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त होने की सूची आई है।
डीआईओएस कार्यालय के अनुसार विद्यालयों से शिक्षकों के रिक्त पदों का अध्याचन अर्थात विषयवार विवरण चयन आयोग को भेजा जाता है। अभी तक विद्यालयों द्वारा भेजे गए विवरण को ही अंतिम रूप से स्वीकार करके नियुक्ति होती है। आरोप है विद्यालय विषयों को बदलने की मनमानी कर लेते थे। इससे विद्यालयों में किसी एक विषय के शिक्षक तो अधिक हो जाते थे जबकि अन्य विषयों के शिक्षकों का संकट हो जाता था।
ये होगी प्रक्रिया
डीआईओएस कार्यालय के मुताबिक विद्यालयों से प्राप्त शिक्षकों के खाली पदों का भौतिक सत्यापन होगा। इसके लिए उच्च स्तरीय टीम गठित हुई। डीएम उमेश मिश्रा समिति के अध्यक्ष हैं। जांच समिति में डीएम द्वारा नामित जिला स्तरीय अधिकारी, ब्लॉक का बीडीओ, आरईएस का सहायक अभियंता, शामिल हैं। टीम को विद्यालयों में जाकर खाली पदों की जांच करनी है। जांच में खाली पद किस विषय का है, कब खाली हुआ है, किस केटेगरी का है आदि बिंदु तय है। जांच रिपोर्ट 26 मई तक शासन को जानी है।
प्रक्रिया में बदलाव छात्र हित में
शासन ने माध्यमिक विद्यालयों में नई शिक्षा नीति लागू की है, जिसमें शिक्षा को रोजगार परक व बहुउद्देशीय बनाने पर जोर है। शासन का प्रयास है कि विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए सभी विषय के शिक्षक उपलब्ध हों। शासन को विद्यालयों में किसी विषय विशेष के शिक्षक नहीं होने की शिकायत मिलती रहती है। प्रक्रिया में बदलाव को छात्र हित में बताया जा रहा है। वर्ष 2021 में कोरोना के कारण शिक्षकों की नियुक्तियां प्रभावित हुईं। शिक्षाविद बलराम सिंह ने फैसले को छात्र हित में सही बताया है।