रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में प्राणायाम संजीवनी
बिजनौर। स्वस्थ जीवन के लिए पौष्टिक आहार और व्यायाम जरूरी है। कोविड-19 की पहली लहर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपायों को समझाने का कार्य आयुर्वेद चिकित्सकों ने किया था। उनकी यह कवायद दूसरी लहर में भी जारी है।
योग विद्या के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है, जिससे प्रेरित होकर लोगों ने योगाभ्यास शुरू किया है। साप्ताहिक कोरोना कर्फ्यू में ज्यादातर घर में लोग योग करते हैं। कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के लिए आयुष विभाग ने योग को बड़ा आधार माना है। आयुष निदेशक ने 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों को लेकर वेबिनार में प्रदेश के समस्त जिलों के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारियों के लिए गाइडलाइन जारी की गई है, जिसमें वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण काल की तर्ज पर ही इस आपदा स्थिति से सामना करने के सुझाव दिये गए। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी डा. इसम पाल सिंह के अनुसार इसमें योग को प्रमुख बताया गया है। आयुर्वेद चिकित्सकों ने टेली मेडिसन पद्धति अपनाकर मरीजों का उपचार किया था, जो बेहद कारगर साबित हुई थी। इंटरनेशनल नैचुरोपैैथी ऑर्गेनाइजेशन के जिला उपाध्यक्ष ओमप्रकाश राणा ने बताया कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने एवं फेफड़ों को मजबूत करने के लिए योगासन आसान करें। नगर के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. विमल कुमार ने बताया कि कोरोना कर्फ्यू में घरों में रहकर ही लोगों ने अनलोम-विलोम, प्राणायाम आदि का अभ्यास जारी रखा, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में काफी इजाफा हुआ।