बिजनौर, नींदडू। जिला मजिस्ट्रेट ने नींदडू खास की प्रधान को गांव में नियमानुसार विकास कार्य नहीं कराकर मनमाने ढंग से बिना कुटेशन कार्य कराने का दोषी मानते हुए वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों के प्रयोग और कृत्यों के संचालन से निलंबित कर दिया था। डीएम के फैसले के विरुद्ध हाईकोर्ट गई प्रधान की याचिका उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी।
रफीक मलिक और खुर्शीद अहमद ने शपथ पत्रों के साथ जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर नींदडू खास में हुए विकास कार्यों में धांधली और शासकीय धनराशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। डीएम ने जिले के अधिकारियों से प्रकरण की जांच कराई थी। जांच में लाइट, फर्नीचर और जीएसटी के भुगतान में अनियमितताएं पाई गई थीं। दोषी पाए जाने पर जिला मजिस्ट्रेट अंकित कुमार अग्रवाल ने 29 फरवरी 2024 को नींदडू खास की प्रधान अदीबा के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार निलंबित करते हुए जांच परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बिजनौर एवं अधिशासी अभियंता प्रांतीय खण्ड लोक निर्माण विभाग बिजनौर को सौंप दी। जबकि ग्राम पंचायत सचिव राकेश कुमार को विभागीय कार्रवाई के तहत स्थानांतरण किया गया था।
प्रधान अदीबा ने जिलाधिकारी के फैसले के विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। दोनों पक्षों की दलीलें और बहस सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने प्रधान की रिट याचिका खारिज कर दी। 29 फरवरी 2024 के आदेश के अनुसरण में गठित जांच समिति से आदेश की तिथि से दो महीने की अवधि के भीतर कानून के अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करने और जिलाधिकारी से रिपोर्ट पर विचारोपरांत एक महीने के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया।