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काव्य सृजन से प्रदीप डेजी ने बनाई पहचान

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प्रदीप डेजी। - फोटो : NAZIBABAD
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काव्य सृजन से प्रदीप डेजी ने बनाई पहचान
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नजीबाबाद। काव्य सृजन में हिंदी की अहम भूमिका है। राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर कवि और संचालक के रूप में प्रदीप डेजी ने हिंदी को काव्य सृजन का सशक्त माध्यम बनाकर अपनी पहचान बनाई।
नजीबाबाद निवासी बाल मुकुंद माहेश्वरी के पुत्र प्रदीप डेजी का साहित्यकार, कवि और संचालक के रूप में महत्वपूर्ण स्थान है। 52 वर्षीय प्रदीप डेजी को हिंदी में मजबूत पकड़ और काव्य सृजन में हिंदी के शब्दों का खूबसूरती के साथ इस्तेमाल करने से लोकप्रियता मिली। प्रदीप डेजी कहते हैं कि बचपन से ही उन्हें हिंदी से अनुराग था। हिंदी ने ही उन्हें देश में बतौर कवि और संचालक के रूप में पहचान दिलाई। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के कार्यकाल में होली महोत्सव में राष्ट्रपति भवन में संचालक के रूप में आमंत्रित किया जाना और श्रोताओं द्वारा उन्हें सराहना प्रदीप डेजी का हिंदी अनुराग और काबिलियत को दर्शाता है। काव्य, गजल, गीत, मुक्तक को मंचों से प्रभावी ढंग से श्रोताओं तक पहुंचाने वाले प्रदीप डेजी को उनके काव्य सृजन और संचालन के लिए अनेक सम्मान मिल चुके हैं।
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रग-रग में हिंदी अनुराग बसाए प्रदीप डेजी ने साढ़े तीन दशक पूर्व अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था की स्थापना की थी। प्रदीप डेजी बताते हैं कि संस्था बनाने का उद्देश्य भी हिंदी साहित्य प्रेमियों को मंच प्रदान करना और हिंदी को समृद्ध बनाना था। उनका विश्वास है कि हिंदी ऐसी भाषा है जो इंसान को राष्ट्रप्रेम, समाजसेवा, सर्वधर्म सौहार्द और अपनत्व की सीख देती है।
हिंदी ने दिलाए अनेक मंच
नजीबाबाद। साहित्यकार प्रदीप डेजी ने आकाशवाणी नजीबाबाद से अनेक प्रसारण दिए। उन्हें रुड़की में संचालक सम्राट की उपाधि मिली। आकाशवाणी, उत्तराखंड सरकार के हरिद्वार महोत्सव में मशहूर बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया और प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पोडवाल के कार्यक्रम के अतिरिक्त प्रदीप डेजी को बाबा नागार्जुन का सानिध्य मिला। प्रदीप ने नामचीन कवि और शायरों की मौजूदगी में हुए मंचीय कार्यक्रमों के साथ नजीबाबाद में डेढ़ दशक पूर्व होने वाले साहित्यिक कुंभ में अपनी हिंदी वाणी से श्रोताओं का दिल जीता। कई वर्षों तक नजीबाबाद की गंगा-जमुनी ईद मुशायरे को बतौर संचालक प्रदीप डेजी ने आवाज दी।
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हिंदी अनुराग ने दिए बह जाओ गंगे मां और साईं भजन
नजीबाबाद। हिंदी अनुराग के चलते प्रदीप डेजी ने बहे जाओ गंगे मां व साईं का नाम सांचा एल्बम के माध्यम से भजन लेखन में भी पहचान बनाई। प्रदीप डेजी को भारतीय ज्ञानपीठ सम्मान पत्र से नवाजा गया है। काव्य संग्रह के क्षेत्र में 76 गजलों का संग्रह दो पल के लिए प्रकाशन में हिंदी ने ही प्रदीप को पहचान दिलाई।
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