बिजनौर। बिजनौर नगर पालिका के सीमा विस्तार होने से अब नगर पालिका की सियासी तस्वीर भी बदल जाएगी। नगर पालिका से जुडे़े 13 गांवों से भी कोई चेयरमैन बन सकेगा। अब तक शहर से ही चेयरमैन बनते थे। नगर पालिका की सारी राजनीति शहर से ही होती थी।
बिजनौर नगर पालिका के विस्तार का प्रस्ताव 1985 को शासन को भेजा गया था। तब से मामला अटका पड़ा था। तमाम नेताओं ने सीमा विस्तार कराने के लिए शासन स्तर पर एड़ी से चोटी तक के जोर लगाए लेकिन विस्तार नहीं हो पाया था। इस अवधि में चाहे कांग्रेस, सपा, बसपा, भाजपा की सरकार रही हों, सबने नगर पालिका का विस्तार कराने के प्रयास किए। नेता इसमें भी अपना नफा-नुकसान भी देख रहे थे। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद फिर से नगर पालिका के विस्तार की कवायद शुरू हुई। भाजपा के तमाम नेता सक्रिय हुए तब जाकर यह सपना 14 साल बाद पूरा हुआ है।
सीमा विस्तार में बिजनौर से सटे गांव रसूलपुर पिरथी, रशीदपुर गढ़ी, इस्लामपुर दास, झकड़ी बांगर फतहपुर नौआद, मुकरपुर खेमा उर्फ बुखारा, लडापुरा, रामपुर बकली, तैमूरपुर दीपा, शहबाजपुर खाना, कादरपुर जसंवत, फरीदपुर काजी को शामिल किया है। इन गांव में अब तक प्रधान ही चुना जाता था। अब इन 13 गांवों से भी कोई बिजनौर नगर पालिका का चेयरमैन बन सकता है। गांव में भी चेयरमैन बनाने की बिसात बिछेगी। अब तक बिजनौर नगर पालिका में 52 प्रतिशत मुस्लिम व 46 प्रतिशत हिंदू मतदाता रहे हैं। यही वजह है कि अक्सर बिजनौर नगर पालिका का चेयरमैन का पद मुस्लिम उम्मीदवार के खाते में ही आता था। सीमा विस्तार के बाद हिंदू मतदाताओं का प्रतिशत बढ़ जाएगा। सीमा विस्तार में कई गांव ऐसे जुड़े है, इनमें हिंदू वोटर अधिक हैं। सीमा विस्तार के बाद कई नेताओं ने चेयरमैन बनने के अभी से सपने देखने शुरू कर दिए हैं।