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स्टेडियम में बिना ‘द्रोण’ ही ‘एकलव्य’ बन रहे खिलाड़ी

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बिजनौर नेहरू स्टेडियम में हॉकी का अभ्यास करता खिलाड़ी विक्रात। - फोटो : BIJNOR
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स्टेडियम में बिना ‘द्रोण’ ही ‘एकलव्य’ बन रहे खिलाड़ी
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बिजनौर। जिले के एकमात्र स्टेडियम ने खेल जगत को कई खिलाड़ी दिए हैं। नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में रोजाना खिलाड़ी अपने भविष्य को संवारने के लिए प्रैक्टिस करने आ रहे हैं। हालांकि बिना कोच के भी खिलाड़ी ऊंचाइयों को छू रहे हैं। हरियाणा में हुए खेलो इंडिया यूथ गेम्स में यूपी की हॉकी टीम में विक्रांत कुमार ने शानदार प्रदर्शन किया। स्टेडियम में स्थित शूटिंग रेंज में खिलाड़ी प्रैक्टिस कर अपनी प्रतिभा निखार रहे हैं।
आज 23 जून को विश्व ओलंपिक दिवस मनाया जा रहा है। नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में खिलाड़ियों की प्रैक्टिस के लिए साधन तो हैं, लेकिन अपने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने वाले द्रोणाचार्य नहीं हैं। स्टेडियम में इस समय शूटिंग कोच दिग्विजय सिंह और एथलेटिक्स कोच जयवीर सिंह हैं। जब स्टेडियम में कोच ही नहीं होंगे तो खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसे पहुंचेंगे। स्टेडियम में कई सालों से हॉकी, वॉलीबाल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेबिल टेनिस, फुटबाल, भारोत्तोलन आदि खेलों के कोच नहीं हैं। हालांकि कुछ खिलाड़ी बिना कोच के ही महारथ हासिल कर रहे हैं। इनमें से ही एक विक्रांत कुमार हैं। जो यूपी टीम की ओर से खेलो इंडिया यूथ गेम्स में खेलें। इसमें यूपी टीम ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही विक्रांत कई सालों से लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रैक्टिस कर रहे हैं। लेकिन बिजनौर स्टेडियम में भी प्रैक्टिस करने जरूर आते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय कोच शूटरों को सिखा रहे शूटिंग के गुर
नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिग्विजय सिंह शूटरों को शूटिंग के गुर सिखा रहे हैं। उन्होंने साल 2011, 2012, 2013 में एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। साथ ही 2009 से राष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने इस दौरान काफी मेडल अपने नाम किए। अब स्टेडियम में खिलाड़ी उनकी छत्रछाया में अपनी प्रतिभा निखार रहे हैं। इसके साथ ही शूटिंग कोच ने बताया कि स्टेडियम में शूटरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए तैयारी कराई जा रही है।
रजिया जैदी ने हॉकी में किया जिले का नाम रोशन
खेल के क्षेत्र में जिले के खिलाड़ी खूब नाम रोशन कर रहे हैं। रजिया जैदी ने भी देशभर में जिले का नाम रोशन किया। 1982 में हुए एशियाड में उनकी कप्तानी में खेलते हुए टीम ने गोल्ड मेडल जीता था। रजिया जैदी छह साल तक भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रहीं। इसके साथ ही उन्होंने गोल कीपर के रूप में विरोधी टीम को गोल के लिए तरसाए रखा।
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डीएम ने दो कोच रखने की दी अनुमति : जिला क्रीड़ाधिकारी
जिला क्रीड़ाधिकारी जयवीर सिंह ने बताया कि स्टेडियम में शूटिंग और एथलेटिक्स के ही कोच है। दूसरे खेलों के खिलाड़ी अभी बिना कोच के ही स्टेडियम में तैयारी कर रहे हैं। साथ ही कहा कि डीएम उमेश मिश्रा ने हॉकी और वॉलीबाल के कोच की नियुक्ति की अनुमति दे दी है। जिसके चलते एक सप्ताह में कोच की नियुक्ति की जाएगी।

बिजनौर में डीएम को ज्ञापन सौंपते जय भारत मंच के कार्यकर्ता।- फोटो : BIJNOR

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