डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि दो दिन अस्पताल में डोनेट प्रक्रिया की टेस्टिंग की जाएगी। वहीं तीसरे दिन से प्लाज्मा थेरेपी पूर्ण रूप से शुरू हो जाएगी। कोरोना संक्रमित मरीज स्वस्थ होने के 15 दिन से लेकर चार महीने तक कोविड संक्रमित मरीजों के लिए अपना प्लाज्मा हर पांचवें दिन में डोनेट कर सकता है।
पैथोलॉजिस्ट डॉ. योगेंद्र सिंह बताते हैं कि प्लाज्मा डोनेट करने से मरीज का एंटीबॉडी टेस्ट किया जाता है। आगरा में मेडिकल एजेंसी से रात में नौ बजे किट मंगवाई। एक डोनर से दो डोज बनती हैं, जो 200-200 एमएल की होती हैं।
पहले आठ दिन होते हैं बेहद ही गंभीर
क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डा. अवधेश वशिष्ठ बताते हैं कि कोरोना संक्रमित होने पर मरीज के लिए शुरुआत के आठ दिन बेहद ही क्रिटिकल होते हैं। इस अवधि में ही सर्वाधिक ऑक्सीजन स्तर गड़बड़ाता है। इसके बाद स्थिति में सुधार होने लगता है। उस दौरान अगर प्लाज्मा चढ़ाया जाए तो यह उसके लिए रामबाण होता है।