चांदपुर की जनता ने पांच बार किया निर्दलीय प्रत्याशियों पर भरोसा
बिजनौर। जिले में चांदपुर विधानसभा इकलौती ऐसी सीट है, जिसकी जनता ने निर्दलीय प्रत्याशी को भी तव्वजो दी है। मिनी छपरौली कही जाने वाली इस सीट पर एक या दो बार नहीं, बल्कि पांच बार निर्दलीयों ने परचम लहराया है। जिले में बाकी किसी भी सीट पर आजादी के बाद से अब कोई निर्दलीय नहीं जीत पाया। हालांकि निर्दलीय की वजह से चुनावी परिणाम बदलते रहे हैं।
साल 2012 में परिसीमन के बाद चांदपुर विधानसभा का पुनर्गठन हुआ। चांदपुर विधानसभा का कुछ हिस्सा नहटौर और कुछ हिस्सा बिजनौर में चला गया। जबकि राजपूत बाहुल्य कुछ गांव चांदपुर में शामिल हुए। जाट बाहुल्य रही इस विधानसभा क्षेत्र से साल 1957 में निर्दलीय उम्मीदवार नरदेव सिंह को विधायक चुनकर विधानसभा भेज दिया। उन्होंने लगातार निर्दलीय लड़ते हुए जीत की हैट्रिक लगाई। साल 1969 में बीकेडी के खाते में यह सीट चली गई। दो बार बीकेडी के उम्मीदवार विजयी रहे तो बाद में जनता पार्टी के उम्मीदवार धर्मवीर सिंह ने साल 1977 के चुनाव में जीत दर्ज कराई। रामलहर में साल 1991 में इस सीट पर भाजपा काबिज हो गई, हालांकि भाजपा अपनी जीत को दोहरा नहीं पाई। 1993 और 1996 में निर्दलीय उम्मीदवारों को चांदपुर की जनता ने जीत का सेहरा पहनाया। 16 साल के बाद भाजपा का सूखा खत्म हुआ और 2017 में भाजपा की कमलेश सैनी विधायक बनीं।
चांदपुर सीट पर अब तक बने विधायक
1957 नरदेव सिंह निर्दलीय
1962 नरदेव सिंह निर्दलीय
1967 नरदेव सिंह निर्दलीय
1969 शिव महेंद्र सिंह बीकेडी
1974 धर्मवीर ङ्क्षसह बीकेडी
1977 धर्मवीर सिंह जनता पार्टी
1980 अमीरुद्दीन कांग्रेस अर्स
1985 राजा देवेंद्र सिंह कांग्रेस
1989 तेजपाल सिंह जनता दल
1991 अमर सिंह भाजपा
1993 तेजपाल सिंह निर्दलीय
1996 स्वामी ओमवेश निर्दलीय
2002 स्वामी ओमवेश रालोद
2007 इकबाल बसपा
2012 इकबाल बसपा
2017 कमलेश सैनी भाजपा