बिजनौर के नींदडू़ में बिरादरी के लोगों की पाबंदी के बावजूद बारात में पटाखे छोड़ने से नाराज पंचों ने बारात को तीन घंटे तक रोके रखा। वर पक्ष की ओर से माफी मांगने और 50 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की शर्त पर ही बारात को रवाना किया गया।
सोमवार को दिल्ली से एक बारात जामा मस्जिद मोहल्ले में आई थी। अंजुमन इस्लाहुल मुस्लेमीन द्वारा माहेगीर बिरादरी की ओर से बारात में डीजे, आतिशबाजी, चढ़त, वीडियोग्राफी और खड़े होकर खाना खिलाने समेत अन्य कार्यों पर पाबंदी की गई थी। इसके बावजूद बारातियों की ओर से आतिशबाजी की गई। इसी दौरान अंजुमन के महासचिव मौलवी अबरार अहमद मौके पर पहुंचे तथा पटाखे नहीं छोड़ने की हिदायत देते हुए लौट आए। बताया जाता है कि इसके बाद भी बाराती नहीं माने और पटाखे छुड़ाते रहे।
इमाम के कई बार समझाने के बावजूद रात की नमाज के बाद पटाखे छोड़ने का सिलसिला और तेज हो गया। इस पर अंजुमन के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद अशरफ, मौलवी शमशीर अहमद, मुफ्ती मोहम्मद जुबैर, मोलवी अबरार अहमद, कारी मोहम्मद अरशद, कारी महफूजुर्रहमान और कारी अब्दुल हफीज आदि उलेमा मस्जिद में जुटने लगे। कन्या पक्ष ने आलिमों के जमा होने की सूचना पाते ही दुल्हन को रुखसत कर दिया।
वापसी में पुलिस चौकी के पास बारातियों ने फिर पटाखे छोड़ने शुरू कर दिए। इस पर माहेगीर बिरादरी के जिम्मेदार हाजी साबिर, हाजी सईद, शमशाद, कफील,
मुस्तकीम प्रधान आदि बिगड़ गए। उन्होंने मदरसा अखलाकिया में तत्काल बिरादरी की पंचायत बुलाई।
बिरादरी के जिम्मेदारों ने इमाम के बार बार मना करने पर आतिशबाजी जारी रखने के लिए बारातियों की जमकर खबर ली तथा माफी मांगने के साथ 50 हजार रुपये जुर्माने का फरमान सुनाकर करीब तीन घंटे बाद बारात को रवाना किया गया। उसके बाद मामला शांत हुआ और समारोह पूरा हो सका।