दाखिले की गाइडलाइन जारी नहीं होने से अभिभावक परेशान
बिजनौर। यूपी बोर्ड का हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट का रिजल्ट पांच छह दिन बाद आने वाला है। स्कूल चार माह से बंद हैं। कोरोना के मामले अभी आने से स्कूलों के जल्दी खुलने की संभावना नहीं हैं। परंतु शासन द्वारा ग्यारहवीं के दाखिलों के लिए कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है। इससे अभिभावकों में बैचेनी है तथा दाखिले की प्रक्रिया घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
जिले के 387 माध्यमिक विद्यालयों के हाईस्कूल के पचास हजार तथा इंटरमीडिएट के चालीस हजार से अधिक छात्र छात्राओं ने यूपी बोर्ड की परीक्षा दी है। परीक्षा परिणाम 27 जून को घोषित करना प्रस्तावित है। स्कूल कोरोना प्रकोप के कारण मार्च से बंद हैं। कोरोना के मामले आने से जल्द खुलने के संकेत नहीं है। हाईस्कूल का रिजल्ट आने के बाद कक्षा 11 में दाखिले शुरू हो जाते हैं। अभिभावकों के लिए ग्यारहवीं के दाखिले महत्वपूर्ण होते हैं। क्योंकि छात्र का हायर एजुकेशन की रूपरेखा यही से शुरू हो जाती है। छात्र मेडिकल लाइन में जाने के लिए ग्यारहवीं में जीवविज्ञान तथा इंजीनियरिंग आदि में जाने के लिए गणित विषय चुनता है। अभिभावकों की मंशा होती है कि उसका पुत्र या पुत्री स्तरीय विद्यालय में पढे़ं। साथ ही जो विद्यालय हाईस्कूल स्तर के है उनके छात्र दूसरे विद्यालय में दाखिला लेते हैं। इसलिए अभिभावक रिजल्ट आने से पहले ही दाखिलों के प्रयास शुरू कर देते हैं।
क्या कहते हैं अभिभावक
विनीत कुमार बताते हैं कि शासन से कक्षा 11 के लिए दाखिलों की कोई प्रक्रिया घोषित नहीं होने से वह असमंजस में हैं। यह बच्चों के कॅरियर से जुड़ा मामला है। शासन रिजल्ट आने से पहले दाखिलों की प्रक्रिया जारी करे। अशोक कुमार का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या उन अभिभावकों के सामने है जिनके बच्चे ऐसे विद्यालय में पढ रहे हैं जहां बच्चे का इच्छुक विषय नहीं है। कैलाश चंद शर्मा ने बताया कि हर अभिभावक बच्चों का दाखिला अच्छे स्कूल में कराना चाहता है। अभिभावक कोरोना के डर से अपने बच्चों को पढ़ने गैर राज्य में भेजना सुरक्षित नहीं मान रहे हैं। कोमल सिंह का कहना है कि स्कूल दाखिलों के बारे में कुछ नहीं बता रहे हैं। कहते हैं कि शासन या विभाग से अभी कोई सूचना नहीं है। कहा सबसे बड़ी समस्या कम पढे़ लिखे या अशिक्षित अभिभावक के सामने है। सुरेंद्र सिंह के मुताबिक शासन दाखिलों की ऐसी व्यवस्था करे कि कोई भी बच्चा दाखिले से नहीं बचे। स्कूल अभिभावकों की परेशानी समझें।
अशोक कुमार।- फोटो : BIJNOR
-कैलाश चंद शर्मा।- फोटो : BIJNOR
कोमल सिंह- फोटो : BIJNOR