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सवाल कम होंगे पर पढ़ने होंगे पूरे सिलेबस

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पेपर घटेंगे, पैटर्न पुराना ही रहेगा
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बिजनौर। शासन ने कोरोना प्रकोप के कारण डिग्री कॉलेजों की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव किए हैं। परीक्षा का समय वह पेपर की संख्या कम होगी, लेकिन विषय का सिलेबस व पेपर पैटर्न में पिछले सालों की तरह रहेगा। ऐसे में छात्रों को परीक्षा में अच्छे अंक लाना आसान नहीं है। शिक्षाविदों के अनुसार मेरिट बनाए रखने के लिए सिलेबस पर फोकस कर परीक्षा तैयारी करनी जरूरी है।
रुहेलखंड विवि परीक्षा समिति की बैठक में शामिल होकर लौटे रुहेलखंड टीचर्स एसोसिएशन (रुटा) के अध्यक्ष तथा वर्धमान कॉलेज बिजनौर में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि विवि की परीक्षा जुलाई में प्रस्तावित है। बैठक में कोरोना प्रकोप को देखते हुए छात्र हित में महत्वपूर्ण फैसले हुए हैं। इनमें पेपरों की संख्या कम करना जैसे प्रमुख बिंदु शामिल हैं। अब विषय के दो या तीन पेपर की जगह एक पेपर होगा।
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बताया कि परीक्षा में विषय का सिलेबस कम नहीं किया गया है। यदि किसी विषय के पिछले सालों में दो पेपर होते थे तथा छात्र को दो किताबें पढ़नी पड़ती थी। तो नई व्यवस्था में पेपर दो की जगह तो एक होगा, परंतु छात्र को परीक्षा की तैयारी के लिए दोनों किताब का सिलेबस पढ़ना होगा। सवाल कम होंगे, लेकिन आएंगे पूरे सिलेबस से। पेपर का पैटर्न नहीं बदला है। पेपर में अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय वह दीर्घ उत्तरीय सवाल होंगे। यदि छात्र ने प्रथम वर्ष की परीक्षा नहीं दी है तो उसे द्वितीय वर्ष की परीक्षा में आने वाले अंकों के आधार पर प्रमोट किया जाएगा।
रुटा अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार के अनुसार कहा कि परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए छात्र को विषय के पूरे सिलेबस को फोकस करके पढ़ाई करनी है। पेपर का पैटर्न को ध्यान में रखकर तैयारी करें। टाइम मैनेजमेंट करना होगा।
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डा. मनीष गुप्ता साहू जैन कॉलेज नजीबाबाद में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। कहना है कि छात्र सिलेबस को देखते हुए लिखने की गति बढ़ाएं। उत्तर संतुलित सवाल के अनुसार दें। अधिक अंक वाले चैप्टर की तैयारी पर फोकस करें।
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