बिजनौर में जिला पंचायत अध्यक्ष उदयनवीरा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग को लेकर सोमवार को कलक्ट्रेट में अफरातफरी मची रही। विरोधी खेमे के समर्थकों ने उदयन वीरा के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष और विपक्षी खेमे के समर्थकों के बीच नोकझोंक हुई। पुलिस ने बचाव कराया। वोटिंग के लिए 22 अगस्त की तिथि निर्धारित होने की जानकारी मिलने पर विपक्षी खेमा चला गया।
अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए कलक्ट्रेट में सुबह से ही गहमागहमी का माहौल था। व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस बल भी तैनात था। जिला जज ने चुनाव के लिए एडीजे संदीप जैन को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया था। पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकने वाले जिला पंचायत सदस्य साकेंद्र चौधरी अपने साथ 32 जिला पंचायत सदस्यों को बस से लेकर करीब पौने 11 बजे कलक्ट्रेट पहुंचे। बस से उतरकर सदस्य डीएम के सभागार में चले गए। इस दौरान विरोधी खेमे के समर्थक भी भारी संख्या में कलक्ट्रेट में आ गए। करीब साढ़े 11 बजे जिला पंचायत अध्यक्ष उदयनवीरा भी गाड़ी से अकेले ही कलक्ट्रेट पहुंचे। सभागार के बाहर गाड़ी से उतरते ही विरोधी खेमे के समर्थकों ने उदयन वीरा को घेर लिया और उनके खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान विरोधी खेमे में शामिल जिला पंचायत सदस्य चमन सिंह भी सभाकक्ष में पहुंच गए। कुछ देर बाद जिला पंचायत अध्यक्ष उदयन वीरा सभागार से निकलकर गाड़ी में बैठने लगे तो विरोधी खेमे के समर्थक गाड़ी के गेट के आगे खड़े हो गए। समर्थकों ने उदयन वीरा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। उदयन वीरा ने उन्हें हटाने की कोशिश की तो भी वे नहीं हटे। इस पर उदयन वीरा से नोकझोंक हो गई। पुलिस व शिव सेना के पूर्व जिला प्रमुख वीर सिंह ने समर्थकों को समझाकर शांत किया।
बाद में पता चला कि पूर्व पीठासीन अधिकारी एडीजे संदीप जैन ने अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए 22 अगस्त की तिथि छुट्टी पर जाने से पहले ही निर्धारित कर दी है। इसका पता चलने पर आगे की कार्रवाई रोक दी गई। पंचायत सदस्य करीब डेढ़ बजे साकेंद्र चौधरी के साथ बस में बैठकर चले गए।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में नहीं झुकेंगे
विरोधी खेमे के नेता साकेंद्र चौधरी का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष उदयन वीरा ने एक ही जाति व धर्म के लोगों की बात की। उनके कार्यकाल में बहुत भ्रष्टाचार हुआ। कहा कि वे और उनके साथी भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में झुकने वाले नहीं हैं। 22 अगस्त को मतदान होना निश्चित है और उस दिन उदयन वीरा से कुर्सी छीन जाएगी।
पूरा विपक्ष दिखा एक
उदयन वीरा के खिलाफ पूरा विपक्ष एक दिखाई दे रहा है। सपा से जुड़े उदयन वीरा को कुर्सी से हटाने के लिए सपा, बसपा, भाजपा और रालोद के नेता, पदाधिकारी व कार्यकर्ता कलक्ट्रेट में जमे रहे। ये नेता पल-पल की खबर अपने उच्च पदाधिकारियों को देते रहे और अधिकारियों से भी अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया के बारे में पूछते रहे। हालांकि कोई भी विधायक, पूर्व विधायक या सांसद मौके पर नहीं दिखाई दिए।
विरोधी खेमा था मतदान को तैयार
विरोधी खेमा अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान को लेकर आश्वस्त दिख रहा था। जब उदयन वीरा अकेले कलक्ट्रेट पहुंचे तो विपक्षी खेमे के समर्थकों में हलचल मच गई। उनको लगने लगा कि कि मतदान में कुछ न कुछ अड़चन आने वाली है।
इस्तीफा देने की रही चर्चा
उदयन वीरा की मौजूदगी में उनके द्वारा इस्तीफा देने की चर्चा भी चलती रही। विरोधी खेमे के समर्थक कहते रहे कि उदयन वीरा के पास 24 सदस्य हैं। अगर उदयन वीरा को लगा कि मतदान में उनकी कुर्सी खतरे में है तो वे इस्तीफा भी दे सकते हैं। अविश्वास प्रस्ताव के कारण उनके अधिकार पहले से ही सीज हैं।
नहीं करने दी निजी बातचीत
उदयन वीरा के सभागार में मौजूद रहने के दौरान सदस्यों ने उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। सूत्रों के अनुसार विरोधी खेमे के नेताओं ने किसी भी पंचायत सदस्य को उदयन वीरा से निजी बातचीत नहीं करने दी। वे बस पंचायत सदस्यों को भड़काने में लगे रहे।
खेमों में बंटी भाजपा
अविश्वास प्रस्ताव पर प्रदेश में सत्तासीन भाजपा भी बंटी नजर आ रही है। भाजपा सांसद डा.यशवंत सिंह व भारतेंद्र सिंह ने कुछ दिनों पहले विरोधी खेमे का समर्थन किया था। सांसद अब भी विपक्षी खेमे के साथ बताए जाते हैं, लेकिन वे कलक्ट्रेट नहीं पहुंचे। भाजपा के दो विधायक अविश्वास प्रस्ताव पर उदयन वीरा के साथ बताए जा रहे हैं। विरोधी खेमा भी मान रहा है कि भाजपा के कुछ लोग उदयन वीरा के साथ हैं।
खेमा बनाए रखना चुनौती
22 अगस्त तक पंचायत सदस्यों को अपने पाले में रखना भी विरोधी खेमे के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इस दौरान सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए उदयन वीरा का खेमा कोई कसर नहीं छोड़ेगा। विरोधी खेमे में शामिल कुछ पंचायत सदस्य पहले से ही उदयन वीरा खेमे के संपर्क में बताए जा रहे हैं। अगर अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाता है तो भी दोबारा चुनाव में एकजुटता दिखाना विपक्षी खेमे के लिए टेढ़ी खीर साबित होगी।