टीबी रोगियों की सेहत सुधार रहीं संस्थाएं
बिजनौर। जिले में 18 साल से कम उम्र के किशोरों की सेहत सुधारने के लिए दस संस्थाएं काम कर रही हैं। इन संस्थाओं ने अब तक 299 बच्चों को गोद लेकर उनके भरण-पोषण और समय पर दवाई देने की जिम्मेदारी उठाई है।
टीबी पीड़ित बच्चों को गोद लेने की शुरुआत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने एक बच्ची को गोद लेकर की थी। सरकार की मंशा है कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त किया जाए। अफसरों के अनुसार जनपद में संचालित संगिनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था धामपुर, शेयर संस्था स्योहारा, वर्क एक्शन फॉर रुरल बाबरपुर (स्याऊ), रोटरी क्लब इंडस्ट्रीयल एरिया, रोटरी क्लब आर्यन बिजनौर ने अब तक 299 बच्चों को गोद लेकर उनकी जिम्मेदारी उठाई है।
शासन ने रोगियों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराने के लिए तरह-तरह की योजनाएं संचालित कर रखी हैं, जिससे लोग जागरूक होकर उपचार कराएं और पूरी तरह से ठीक हो सकें। टीबी के अधिकांश मरीज मजदूर तबके के हैं, जो दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में निवास करते हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. बीएस रावत ने बताया कि वर्तमान में जनपद में 19 टीबी यूनिटों के माध्यम से मरीजों की क्षय रोग की जांच और उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 33 स्वास्थ्य केंद्रों पर बलगम की जांच की जा रही है, जबकि तीन सीबीनॉट मशीनों के अलावा सात ट्रूनॉट मशीनों द्वारा टीबी की उच्च स्तरीय जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि दस संस्थाओं ने 18 वर्ष से कम आयु के 299 किशोरों को गोद लिया है। वर्तमान में कुल मिलाकर जिले भर में 3765 मरीज उपचार करा रहे हैं।