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जिला ब्लड बैंक में पड़ने लगा है रक्त का टोटा

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जिला ब्लड बैंक में बचा मात्र 48 यूनिट ब्लड
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बिजनौर। जनपद में ब्लड का टोटा पड़ने लगा है। शासन ने कोरोना संक्रमण काल के कारण पिछले दो माह से रक्तदान शिविरों के आयोजन पर रोक लगा रखी है। ऐसे में उत्पन्न हुए संकट काल में मरीज और उनके परिजनों को भी यह परेशानी झेलनी पड़ रही है। अब केवल 48 यूनिट ब्लड ही जिला रक्त कोष में शेष बचा है।
जिला अस्पताल स्थित जिला रक्त कोष की कुल क्षमता 300 यूनिट रक्त संग्रहीत करने की है। अब केवल इसका केवल 16 प्रतिशत यानी करीब 48 यूनिट रक्त ही बचा है। ऐसे आपातकालीन स्थिति में प्रसूति व गर्भवती महिलाएं, गंभीर बीमार और दुर्घटनाग्रस्त लोगों के लिए ब्लड बैंक में खून की कमी है।
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केवल आपातकालीन परिस्थिति के लिए ही बचा है खून
हालांकि विकट परिस्थिति में मरीजों के परिजन ब्लड डोनेट कर खून की आपूर्ति कर रहे हैं। कुछ संस्थाएं भी इस काम में आगे आई हैं। इसके बावजूद गर्भवती, प्रसूति, गंभीर बीमार और दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों को आकस्मिक खून की जरूरतों के लिए ही रक्त बचा है।
300 की क्षमता, बचा है मात्र 48 यूनिट ब्लड
जिला रक्त कोष में एकमात्र सरकारी ब्लड बैंक खून की भारी कमी से जूझ रहा है। इस ब्लड बैंक में 300 यूनिट ब्लड रखने की क्षमता है, लेकिन यहां मात्र 48 यूनिट ब्लड ही उपलब्ध हैं। आम दिनों में इस बैंक में 100-150 यूनिट ब्लड रखा मिलता है, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर का असर साफ देखने को मिल रहा है।
सामान्य दिनों में होती है 20 यूनिट ब्लड की खपत
जिला अस्पताल के रक्त कोष में सामान्य दिनों में प्रतिदिन 15 से 20 यूनिट ब्लड की खपत होती है, जबकि आजकल कोरोना काल में ओपीडी और अन्य गंभीर मामले बंद होने से मात्र चार से पांच यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। इमरजेंसी में मांग आठ यूनिट तक पहुंच जाती है। हाल के दिनों में जिले में खून की कमी के कारण कोई बड़ी समस्या उत्पन्न नहीं हुई हैं।
नेगेटिव ग्रुप के ब्लड की है कमी
जिला ब्लड बैंक अधिकारी डॉ. संजय कुमार शंकर बताते हैं कि ब्लड बैंक में रक्तसमूह के निगेटिव एंटीजेन की लगातार कमी बनी रहती है। रक्त अधिकोष में ओ पॉजिटिव का दो, बी पॉजिटिव का छह और एबी पॉजिटिव और ए नेगेटिव के अलावा किसी भी प्रकार का एक भी यूनिट नहीं हैं।
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ब्लड एक्सचेंज करने में भी आ रही परेशानी
जिला रक्त कोष के तकनीकीअधिकारी राकेश कुुमार चौहान के अनुसार गिनेचुने ब्लड ग्रुप के रहने से मरीज के परिजनों को ब्लड एक्सचेंज में भी परेशानी झेल रहे हैं। आमतौर पर जिला अस्पताल के महिला एवं प्रसूति विभाग में प्रतिदिन तीन से चार यूनिट ब्लड की ही जरूरत होती है। गर्भवती और प्रसूति महिलाओं के परिजन ब्लड डोनेट करने को तैयार भी मिलते हैं, लेकिन कुछ ही ब्लड ग्रुप उपलब्ध होने के कारण उनकी परेशानी बनी ही रहती है।
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