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जिले में सिर्फ 35 किसानों को ही मिलेगा फसल बीमा

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जिले में सिर्फ 35 किसानों को ही मिलेगा फसल बीमा
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बिजनौर। फसल बीमा के लिए किसानों का प्रीमियम काटने वाली कंपनी ने खरीफ की फसलों में 3261 किसानों का बीमा किया, लेकिन बारिश से हुए नुकसान के लिए 35 किसानों को ही मुआवजे का पात्र माना है। बीमा कंपनी द्वारा 35 किसानों के ही नाम मुआवजे के लिए भेजे गए हैं, बाकी किसानों की फसलों को नुकसान न होने की बात कही जा रही है।
खेतों में खड़ी फसलों का भी बीमा होता है। पहले प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल बीमा अनिवार्य था। बाद में इससे गन्ने को बाहर कर दिया गया और फिर योजना स्वैच्छिक कर दी गई। यानी अब किसान की मर्जी है कि वे बीमा कराएं या न कराएं। हालांकि जागरूक किसान अब भी फसलों का बीमा करा रहे हैं और यह कई बार फायदे का सौदा भी साबित होता है। जिले में खरीफ की फसलों के लिए तीन हजार 261 किसानों ने इफ्को टोकियो कंपनी से बीमा कराया था। खरीफ में मुख्य रूप से धान और उड़द की फसल शामिल रहती है। जिले में इन फसलों का रकबा करीब 50 हजार हेक्टेयर रहता है। जब बारिश हुई तब जिले में धान की कटाई शुरू ही हुई थी, लेकिन कंपनी की माने तो जिले में उसके यहां बीमा कराने वाले करीब सवा तीन हजार किसानों में से 35 किसानों की फसलों को ही नुकसान हुआ है। केवल इतने किसानों को ही मुआवजा दिया जाएगा।
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ऐसे कटता है प्रीमियम
किसान बैंकों से केसीसी पर ऋण लेते हैं। इस ऋण पर बीमा कंपनी डेढ़ से दो प्रतिशत तक प्रीमियम काटती है। किसान बैंक में यह लिखकर देता है कि उसे कौन सी फसल का बीमा कराना है। इसके अलावा जनसेवा केंद्रों से भी फसलों का बीमा किया जा सकता है।
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सिर्फ 35 किसानों ने ही की मुआवजे की मांग : जिला कोआर्डिनेटर
बारिश से जिले की फसलों को बहुत नुकसान हुआ। कई जगह फसल गल गई और दाना भी काला पड़ गया। यानी उत्पादन कम हो गया और गुणवत्ता भी खत्म हो गई। इस सबका मुआवजा बीमा कंपनी द्वारा ही किसान को दिया जाता है। बीमा कंपनी इफ्को टोकियो के जिला कोआर्डिनेटर विक्रम सिंह के अनुसार 35 किसानों ने ही मुआवजे की मांग की है। मुआवजे संबंधी प्रक्रिया चल रही है।
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